Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल में अगले कुछ महीनों में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में प्रदेश की मुख्यमंत्री और टीएमसी यानी तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी अपने विरोधियों पर पूरी आक्रमता के साथ हावी हो रही हैं। यह तो जानते ही होंगे कि सीएम ममता एसआईआर यानी विशेष गहन संशोधन के मुद्दे को देश की शीर्ष अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट में ले जा चुकी हैं। दूसरी तरफ विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा यानी भारतीय जनता पार्टी टीएमसी को पूरी ताकत के साथ घेर रही है। ऐसे में दोनों पार्टियों की खींचतान के बीच पश्चिम बंगाल के वोटर्स किस तरह से सटीक फैसला ले सकते हैं।
CM Mamata Banerjee एसआईआर को बना रही हैं चुनावी मुद्दा
टीएमसी अध्यक्ष ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में एसआईआर के मसले से चुनावी फायदा उठाने की तैयारी कर ली है। सीएम ममता एसआईआर के जरिए केंद्र और चुनाव आयोग पर वोटर्स के नाम काटने और कई नामों को हटाने का आरोप लगा रही हैं। सीएम ममता के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के अल्पसंख्यक, प्रवासी और गरीब श्रेणी में आने वाले लोग इससे सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। सीएम ममता ने अभी तक प्रदेश के लोगों को बताया है कि आपका वोट काटा जा रहा है, ताकि विरोधी दल सत्ता पर कब्जा कर सके। ऐसे में टीएमसी अपने वोटर्स को भावनात्मक तौर पर अपनी ओर खींचने का प्रयास कर रही है।
ममता बनर्जी को घेरने के लिए बीजेपी ने कर ली पूरी तैयारी
दूसरी तरफ, ममता बनर्जी को घेरते हुए भाजपा टीएमसी सरकार पर घुसपैठ को बढ़ावा देने और घुसपैठियों को अपने वोटर्स बनाने का गंभीर लगाया। टीएमसी सरकार आगामी चुनावों की वजह से बांग्लादेशी घुसपैठिओं को नजरअंदाज कर रही है। बीजेपी का कहना है कि ममता सरकार के इस रवैये से प्रदेश में सुरक्षा का खतरा बढ़ सकता है। इसके साथ ही राज्य के स्थानीय नागरिकों पर इसका बुरा प्रभाव पड़ेगा। वहीं, घुसपैठिए अनुचित ढंग से देश के संसाधनों का लाभ उठा सकते हैं। इतना ही नहीं, भाजपा के मुताबिक, ममता सरकार की इस रणनीति से प्रदेश के लोगों की पहचान भी खतरे में पड़ सकती है। पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, मालदा, मुर्शिदाबाद और कूचबिहार जैसे क्षेत्रों में इसका सबसे अधिक प्रभाव पड़ सकता है।
क्या वोटर्स पर पड़ेगा इसका असर?
पश्चिम बंगाल में सीएम ममता बनर्जी और बीजेपी के बीच खींचती हुई राजनीतिक खाई के बीच प्रदेश के वोटर्स स्थानीय मुद्दों और रोजगार के मसलों का ध्यान रखते हुए विधानसभा चुनाव में सही निर्णय ले सकते हैं। हालांकि, दोनों पार्टियों के कोर वोटर्स अपनी पार्टी के प्रति प्रतिबद्धता दिखा सकते हैं।
