Nepal floods: इस सप्ताह की शुरुआत में नेपाल के भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के क्षेत्रों में आई विनाशकारी बाढ़ ने कई जिलों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। तेज बहाव के कारण कई पुल, अधिकतर प्रमुख सड़कें और महत्वपूर्ण जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। नेपाली मीडिया के अनुसार, इस बाढ़ में अबतक कम से कम 472 लोगों की मौत हो गई है और 1400 लोग लापता हैं। बाढ़ में में फंसे नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। स्थानीय मीडिया की मानें तो इस त्रासदी में मरने वालों की संख्या में इजाफा हो सकता है। सबसे ज़्यादा प्रभावित इलाकों में घर, सड़कें और पुल नष्ट हो गए हैं और बड़े क्षेत्र कीचड़, पत्थरों और मलबे से ढक गए हैं।
Nepal floods: नेपाल पर दूसरी बाढ़ का खतरा मंडराया!
आपको बता दें कि गुरुवार रात तक, नेपाल बाढ़ में फंसे 290 भारतीयों से अबतक संपर्क नहीं हो पाया है, जबकि त्रिशूली-I प्रोजेक्ट के 63 मज़दूरों और तमिलनाडु के 21 मज़दूरों समेत 84 लोगों को सुरक्षित बचाया जा सका है। मालूम हो कि नेपाल एक और बड़ी आपदा में फंस सकता है। इसके पीछे की वजह यह है कि अभी भी यहां बाढ़ का खतरा टला नहीं है।
खबर है कि चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने छोचेन खोला और पुरेपु सांगपो के संगम पर बनी बैरियर लेक के अगले 72 घंटे में टूटने का हाई रिस्क बताया है। जिसको लेकर हाई अलर्ट पर सभी को रहने को कहा गया है। साथ ही इस संबंध में चेतावनी भी जारी कर दी गई है। चीनी मीडिया के मुताबिक, हाल ही में सैटेलाइट तस्वीरें सामने आईं थीं, जिनमें नजर आ रहा था कि एक बड़ी बैरियर लेक बन गई है। बहरहाल, लोगों को किनारों से दूर रहने के लिए कहा गया है। अब तक 469 लोगों की मौत चुकी है और 1400 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है।
नेपाल बाढ़: भारत के लिए भी खतरे की घंटी?
आपको बता दें कि छोचेन खोला और पुरेपु सांगपो के संगम का यह इलाका भारत से सीधे सटा हुआ नहीं है, लेकिन इसका नदी तंत्र भारत से जुड़ा रहा है। जानकारों की मानें तो झील और दोनों नदियों का संगम भारत की सीमा से तकरीबन 140 किलोमीटर के आसपास है। दूसरी कड़ी यह है कि नेपाल-चीन सीमा पर रसुवागढ़ी-ग्यिरोंग बॉर्डर क्रॉसिंग मौजूद है। जो करीब 18 किलोमीटर ऊपर की तरफ बताया जा रहा है। मतलब यह है कि भौतिक दूरी भले ही भारत से बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन ध्यान देने बात यह है कि इस इलाके से निकलने वाला पानी नेपाल से होकर आखिरकार गंडक नदी के जरिए बिहार में प्रवेश करता है। जो चिंता का विषय बना हुआ है।







