Mohan Bhagwat: पश्चिम एशिया में संघर्ष का दौर छिड़ा है। ईरान के समक्ष इजरायल और अमेरिका प्रतिद्वंदी बने लगातार हमले कर रहे हैं। मिडिल ईस्ट में इस युद्ध को लेकर हलचल तेज है और बयानों का दौर भी जारी है। इसी बीच आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का भी एक बयान सामने आया है।
मोहन भागवत ने जोर देकर कहा है कि भारत ही पश्चिम एशिया में छिड़े संघर्ष को खत्म करा सकता है। आरएसएस चीफ ने संयुक्त अरब अमीरात और फिनलैंड जैसे देशों का हवाला दिया जो पहले भी भारत को इजरायल-ईरान वॉर के बीच हस्तक्षेप करने की अपील कर चुके हैं। उन्होंने धर्मांतरण पर भी खुलकर अपनी बात रखी है जिसको लेकर खबरें बन रही हैं।
इजरायल-ईरान वॉर पर Mohan Bhagwat की दो टूक!
संघ प्रमुख ने नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पश्चिम एशिया में छिड़े संघर्ष पर अपना पक्ष रखा है। मोहन भागवत ने फिनलैंड और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों का हवाला देते हुए कहा है कि दुनिया मान रही है भारत ही पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को खत्म कर सकता है। उन्होंने उन देशों का जिक्र भी किया जो भारत से हस्तक्षेप करने की मांग कर रहे हैं।
VIDEO | Maharashtra: “Several countries saying only India can bring an end to ongoing war”, says RSS chief Mohan Bhagwat in Nagpur.
(Full video available on PTI Videos – https://t.co/n147TvrpG7) pic.twitter.com/hazJUGnkmJ
— Press Trust of India (@PTI_News) March 20, 2026
दरअसल, भारत के संबंध अमेरिका और इजरायल से बेहद मजबूत हैं। वहीं ईरान भी दशकों से कई पहलुओं पर भारत का करीबी साझेदार रहा है। यही वजह है कि दुनिया भारत को एक मजबूत माध्यम के रूप में देख रही है। इसी का जिक्र करते हुए संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भी पश्चिम एशिया में छिड़े संघर्ष को खत्म कराने में भारत पर दुनिया की नजरों का जिक्र किया है।
जबरन धर्मांतरण पर भी खुलकर बोले RSS प्रमुख!
नागपुर में विश्व हिंदू परिषद के विदर्भ प्रांत कार्यालय के शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान संघ प्रमुख मोहन भागवत ने धर्मांतरण पर भी खुलकर अपना पक्ष रखा है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि धार्मिक असहिष्णुता, जबरन धर्मांतरण और श्रेष्ठता और हीनता का विचार अभी भी मौजूद है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए समाज को आगे आना होगा।
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि लोगों को दैनिक व्यवहार में इनके खिलाफ मुखरता से आवाज उठानी होगी, तब जाकर इन कुरीतियों से समाज को मुक्त किया जा सकता है। गौरतलब है कि इससे पूर्व भी कई मौकों पर मोहन भागवत जबरन धर्मांतरण को अवैध बताते हुए इसके खिलाफ कार्रवाई की बात कह चुके हैं।
