Rahul Gandhi: खामेनेई की मौत पर सरकार की चुप्पी बनी मुद्दा! सोनिया गांधी की नई लेख साझा कर LoP की नसीहत, सवालों में विदेश नीति

ईरानी सुप्रीम लीडर की मौत पर भारत सरकार की चुप्पी विपक्ष के लिए मुद्दा बन गई है। इसी क्रम में Rahul Gandhi ने राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी द्वारा लिखे गए एक लेख को साझा करते हुए सरकार पर सवाल उठाए हैं।

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Picture Credit: गूगल (राहुल गांधी - सांकेतिक तस्वीर)

Rahul Gandhi: ईरानी सुप्रीम लीडर की मौत विश्व व्यापी चर्चा का विषय बनी है। दुनिया भर से तेहरान में हुए घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया आ रही है। इस बीच भारत गुटनिरपेक्ष भाव के साथ अपनी डिप्लोमेसी के तहत काम कर रहा है। राहुल गांधी ने इसको लेकर सवाल उठाते हैं।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी का एक लेख साझा किया गया है। सोनिया गांधी अपनी लेख में आयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर भारत सरकार की चुप्पी को सवालों के घेरे में ले रही है। इसी का जिक्र करते हुए राहुल गांधी ने भी सरकार को नसीहत दी है और विदेश नीति पर सवाल उठाए हैं।

सोनिया गांधी की नई लेख साझा कर Rahul Gandhi ने उठाए सवाल!

कांग्रेस राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी ने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ अखबार के संपादकीय पृष्ठ पर अपने विचार साझा किए हैं। इस दौरान उन्होंने अली खामेनेई की मौत पर सरकार की चुप्पी को सवालों के घेरे में लिया है। ‘ईरान के नेता की हत्या पर सरकार की चुप्पी तटस्थता नहीं, बल्कि कर्तव्यहीनता है’ इसी शीर्षक के साथ सोनिया गांधी का लेख है जिसे राहुल गांधी ने साझा किया है।

राहुल गांधी ने सरकार को नसीहत देते हुए लिखा है कि “जब किसी विदेशी नेता की लक्षित हत्या पर हमारा देश संप्रभुता या अंतरराष्ट्रीय कानून का कोई स्पष्ट बचाव नहीं करता और निष्पक्षता का त्याग कर देता है, तो इससे हमारी विदेश नीति की दिशा और विश्वसनीयता पर गंभीर संदेह पैदा होता है। ऐसे में चुप्पी साधना तटस्थता नहीं है। भारत को संप्रभुता और शांति के लिए खड़ा होना चाहिए और अपनी नैतिक शक्ति को फिर से प्राप्त करना चाहिए।” राहुल गांधी की इस प्रतिक्रिया को लेकर खूब सुर्खियां बन रही हैं।

ईरानी सुप्रीम लीडर की मौत पर सरकार की चुप्पी के पीछे तर्क!

अली खामेनेई की मौत के बाद भारत के विभिन्न हिस्सों में मुसलमानों का जुलूस देखने को मिला है। शिया मुसलमान खुलकर खामेनेई की मौत पर विलाप कर रहे हैं। इस बीच भारत सरकार तटस्थ है। सरकार के मुखिया पीएम मोदी ने अली खामेनेई की मौत पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। ईरानी सुप्रीम लीडर की मौत पर मोदी सरकार की चुप्पी के पीछे कई तर्क हैं। कहा जा रहा है कि ईरान और इजरायल में भारत के लिए इजरायल का चुनाव ज्यादा बेहतर है। इजरायल से भारत की रक्षा आपूर्ति जुड़ी है।

इतना ही नहीं, ईरान कई मौकों पर पाकिस्तान को समर्थन देते हुए भारत के खिलाफ भी गया है। हालांकि, कई मौकों पर ईरान का साथ भी भारत को मिला है। जम्मू-कश्मीर में जब 370 हटा था, तब भी ईरान की तल्ख प्रतिक्रिया आई थी। इन सभी पहलुओं को आधार बनाकर भारत गुट निरपेक्ष भाव के साथ तटस्थ रहना पसंद करता है। यही वजह है कि अली खामेनेई की मौत पर भारत सरकार की ओर से कोई विशेष प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, इसको लेकर राहुल गांंधी समेत तमाम नेता सवाल भी उठा रहे हैं।

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