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SBI Electoral Bond: चुनावी बांड मामले में एसबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया हलफनामा, जानें पूरी डिटेल

SBI Electoral Bond: भारतीय स्टेट बैंक ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार चुनावी बांड के सभी विवरण चुनाव आयोग को भेजने के एक दिन बाद बुधवार को चुनावी बांड मामले में एक हलफनामा दायर किया। आपको बता दें कि हलफनामे में, सार्वजनिक ऋणदाता ने 15 फरवरी, 2024 तक खरीदे गए और भुनाए गए चुनावी बांड का ...

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By: Anurag Tripathi

Published: मार्च 13, 2024 1:41 अपराह्न

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SBI Electoral Bond: भारतीय स्टेट बैंक ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार चुनावी बांड के सभी विवरण चुनाव आयोग को भेजने के एक दिन बाद बुधवार को चुनावी बांड मामले में एक हलफनामा दायर किया। आपको बता दें कि हलफनामे में, सार्वजनिक ऋणदाता ने 15 फरवरी, 2024 तक खरीदे गए और भुनाए गए चुनावी बांड का विवरण साझा किया है।

हलफनामे में क्या कहा गया है?

आपको बताते चले कि हलफनामे में कहा गया है कि बैंक ने चुनाव आयोग को चुनावी बांड के नकदीकरण की तारीख, योगदान प्राप्त करने वाले राजनीतिक दलों के नाम और उक्त बांड के मूल्य के बारे में विवरण भी प्रस्तुत किया है। एसबीआई का कहना है कि डेटा 12 अप्रैल, 2019 से 15 फरवरी, 2024 के बीच खरीदे और भुनाए गए बांड के संबंध में प्रस्तुत किया गया है।

एसबीआई द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक, 1 अप्रैल 2019 से उसी साल 11 अप्रैल के बीच कुल 3,346 चुनावी बांड खरीदे गए। आंकड़ों से पता चलता है कि कुल 1,609 बांड भुनाए गए।

SBI Electoral Bond: क्या है पूरा मामला?

गौरतलब है कि एसबीआई को यह निर्देश शीर्ष अदालत द्वारा एक ऐतिहासिक फैसले में चुनावी बांड को ‘असंवैधानिक’ और ‘अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत सूचना के अधिकार का उल्लंघन’ करार देने के एक महीने बाद आया है। चुनावी बांड योजना को केंद्र द्वारा 2 जनवरी, 2018 को अधिसूचित किया गया था। बता दें कि इसे राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता लाने के प्रयासों के तहत राजनीतिक दलों को दिए जाने वाले नकद दान के विकल्प के रूप में पेश किया गया था।

एसबीआई का तर्क पर न्यायालय की प्रतिक्रिया

एसबीआई ने तर्क दिया कि गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए अलग-अलग अनुभागों में संग्रहीत डेटा को इकट्ठा करने, सत्यापित करने और जारी करने के लिए महत्वपूर्ण समय की आवश्यकता होगी। बैंक ने आवश्यक जानकारी को गोपनीय रखने का दावा करते हुए 30 जून तक विस्तार का अनुरोध किया।

सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क का खंडन करते हुए कहा कि दानदाता का विवरण एसबीआई की मुंबई शाखा में पहले से ही उपलब्ध था। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि बैंक को बस “लिफाफे खोलने, विवरण संकलित करने और जानकारी प्रदान करने” की आवश्यकता है। मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने स्पष्ट किया, हमने आपसे मिलान अभ्यास करने के लिए नहीं कहा था। हमने सीधे खुलासे का अनुरोध किया।

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Anurag Tripathi

अनुराग त्रिपाठी को पत्रकारिता का 2 साल से अधिक का अनुभव है। उन्होंने महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी से अपनी पत्रकारिता की डिग्री प्राप्त की है। वह बिजनेस, यूटिलिटी, पॉलिटिक्स विषयों पर लिखने में रूचि रखते है। वर्तमान में वह डीएनपी इंडिया के साथ कार्यरत है।
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