Shashi Tharoor: मध्य पूर्व में स्थिति तनावपूर्ण हो चुकी है। ईरान पर इजरायली हमले का असर पूरी दुनिया पर पड़ता नजर आ रहा है। ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करना रणनीतिक रूप से दुनिया को कमजोर कर रहा है। इससे दुनिया भर में कच्चे तेल की सप्लाई बाधित है। मिडिल ईस्ट में अस्थिरता के बीच शशि थरूर की प्रतिक्रिया भी आई है।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने मध्य पूर्व में अस्थिरता, कच्चे तेल की समस्या व अन्य उठा-पटक के बीच सधी टिप्पणी की है। इस दौरान उन्होंने इशारों-इशारों में विपक्ष को नसीहत देते हुए कहा है कि सरकार द्वारा किए गए विकल्पों का सम्मान करना चाहिए। शशि थरूर की ये प्रतिक्रिया खूब चर्चाओं में है और इसको लेकर खबरें बन रही हैं।
मिडिल ईस्ट में अस्थिरता के बीच Shashi Tharoor मुखर!
बेबाकी से अपना पक्ष रखने वाले शशि थरूर ने मिडिल ईस्ट में अस्थिरता के बीच प्रतिक्रिया दी है।
शशि थरूर ने इंडिया टूडे को दिए एक साक्षात्कार के दौरान कहा है कि भारत को मिडिल ईस्ट की हालिया स्थिति की समीक्षा करनी चाहिए। कांग्रेस सांसद ने खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों भारतीयों के प्रति चिंता व्यक्त की है। शशि थरूर का साफ कहना है कि मिडिल ईस्ट में रहने वाले लाखों भारतीयों को हालिया समीकरण प्रभावित करता है। इसलिए हम उदासीन नहीं रह सकते।
कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होने और अमेरिका द्वारा भारत को मिली छूट के संदर्भ में भी शशि थरूर की प्रतिक्रिया आई है। उनका कहना है कि “समस्या इसके परिणामों की है। जो कंपनियां रूसी तेल खरीदकर अपनी रिफाइनरियों में इस्तेमाल कर रही हैं, उन्हें उस छूट के बिना प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा, जिसका असर उनके सभी व्यवसायों पर पड़ेगा। इसलिए, मेरे विचार से, एक निर्णय लेना ही होगा।”
विपक्ष को इशारों-इशारों में नसीहत देते हुए शशि थरूर ने कहा कि “मुझे लगता है कि वास्तव में सरकार द्वारा किए गए विकल्पों का सम्मान करना होगा, क्योंकि वे उस समय भारत के सर्वोत्तम हित में हैं। यह देखते हुए कि अन्य विकल्पों के परिणाम होंगे।” मालूम हो कि अमेरिकी छूट का विपक्ष मुखरता से विरोध कर रहा है। उसी बीच सांसद थरूर की प्रतिक्रिया आई है।
रूसी तेल की खरीद पर अमेरिकी छूट को लेकर क्या बोले सांसद थरूर?
गौरतलब है कि विपक्ष अमेरिका द्वारा भारत को रूसी कच्चा तेल खरीदने की छूट देने का विरोध कर रहा है। इस बीच शशि थरूर ने सधी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस सांसद का साफ कहना है कि अमेरिकी छूट से भारतीय रिफाइनरियों को प्रतिबंधों का जोखिम उठाए बिना काफी राहत मिलेगी। इसकी मदद से कंपनियां 30 दिनों के लिए खुलकर खरीदारी कर सकती हैं। नीतिगत विकल्पों का मूल्यांकन राष्ट्रीय हित के संदर्भ में किया जाना चाहिए। ये दर्शाता है कि कैसे शशि थरूर इस विषम परिस्थिति में सरकार से कदम से कदम मिला रहे हैं।
