SIR 2025: पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इन चुनावों से पहले, राज्य में विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर राजनीतिक हलचल तेज़ है। सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी और चुनाव आयोग एसआईआर 2025 की आड़ में पश्चिम बंगाल में लाखों वोटरों के नाम हटाने की साज़िश कर रहे हैं। वहीं, इन सबके बीच पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के दौरान हुए खुलासों ने बंगाल से लेकर दिल्ली तक में हलचल मचा दी है।
SIR 2025: पश्चिम बंगाल मतदाता सूची में 26 लाख फर्जी वोट!
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पश्चिम बंगाल की मौजूदा वोटर लिस्ट और 2002 में तैयार की गई मतदाता सूची में करीब 26 लाख नामों का मिलान नहीं हो पा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, यह अंतर तब सामने आया जब राज्य की लेटेस्ट वोटर लिस्ट की तुलना 2002 और 2006 के बीच तैयार की गई एसआईआर 2025 (सिस्टेमैटिक आइडेंटिफिकेशन रजिस्टर) लिस्ट से की गई। चुनाव आयोग के अनुसार, बंगाल का मुद्दा इसलिए ज़्यादा अहम और सेंसिटिव माना जा रहा है, क्योंकि कई राजनीतिक पार्टियों ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन कार्यक्रम का लगातार विरोध किया है। इससे यह सवाल उठता है कि ये 26 लाख वोटर कौन हैं? इससे भी ज़रूरी बात यह है कि उनके नाम वोटर लिस्ट में कैसे जुड़ गए? हालांकि, इन सवालों का जवाब तभी मिलेगा जब चुनाव आयोग फाइनल लिस्ट जारी करेगा।
एसआईआर 2025: यूपी में 21 बीएलओ पर कसा कानूनी शिकंजा
इधर, उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर 2025 अभियान को लेकर जुड़ी बड़ी खबरे सामने आई है। गाजियाबाद के सिहानी गेट पुलिस स्टेशन में 21 बीएलओ के खिलाफ गणना प्रपत्र समय से जमा न करने और ऑनलाइन फीड में बड़ी लापरवाही बरतने के कारण केस दर्ज किया गया है। अब निर्वाचन विभाग की शिकायत के बाद पुलिस इस कार्रवाई की जांच में जुटी है। आरोप है कि बीएलओ न तो समय पर गणना प्रपत्र जमा कर रहे थे और न ही ऑनलाइन फीडिंग प्रोसेस में ज़रूरी मदद कर रहे थे। शिकायत के मुताबिक, कई बीएलओ ने कैंपेन के दौरान घर-घर जाकर गणना प्रपत्र जमा करने के प्रकिया को गंभीरता से नहीं लिया। इसके अलावा, ऑनलाइन फीडिंग में काफी देरी और गड़बड़ियां देखी गईं। आरोपी कर्मचारियों में शिक्षा विभाग, बिजली निगम, नगर निगम, जीडीए और पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट के अधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं।
