SIR Controversy: चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है जहां फॉर्म 6 में बदलाव और मतदाता सूची में फेरबदल को लेकर विपक्ष लगातार हमलावर हैं। वहीं इस सब के बीच चुनाव आयोग सुप्रीम कोर्ट पहुंचकर एक हलफनामा दे चुके हैं जिसमें कहा गया है कि फॉर्म में 6 में बदलाव का अधिकार सिर्फ केंद्र सरकार के पास है और इनके तहत नियम भी है। आइएजानते हैं आखिर क्या है पूरी खबर। इसके तहत आने वाले नए वोटर्स को किन परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
क्या बढ़ने वाली पहली बार वोट देने वालों की परेशानी
वहीं इस सबके बीच कहा जा रहा है कि मतदाता सूची में फेरबदल और एसआईआर प्रक्रिया के दौरान नए वोटरों को अब यह साबित करना होगा कि उनके नाम माता-पिता का नाम और उनकी पहचान पुरानी वोटर लिस्ट यानी जो साल 2002 में बनी थी उसमें मौजूद है या नहीं। ऐसे में पहली बार आप वोट दे रहे हैं उन्हें परेशानी हो सकती है। पहले भी कोर्ट में यह बताया जा चुका है कि फॉर्म 6 में किसी भी तरह का कोई बदलाव नहीं किया गया है।
ज्ञानेश कुमार का चुनाव आयोग ने दिया साथ
दरअसल विपक्ष की तरफ से यह आरोप लगाया जा रहा था कि मतदाता सूची में फेरबदल और उससे जुड़े फैसले अकेले ज्ञानेश कुमार की तरफ से लिए गए हैं। बाकी 2 मुख्य चुनाव आयुक्त से किसी भी तरह की राय नहीं ली गई लेकिन इन सब आरोपों को चुनाव आयोग ने खारिज करते हुए कहा कि सभी फैसले आपसी सहमति और आयोग के सभी सदस्यों के साथ लिए गए थे। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 24 जून 2025, 27 अक्टूबर 2025 और 14 मई 2026 को यह फैसले लिए गए थे।
एसआईआर विवाद को लेकर फिलहाल मामला शांत होता हुआ नहीं दिख रहा है और विपक्ष ज्ञानेश कुमार को कुर्सी से हटाने के लिए लगातार अडिग नजर आ रहे हैं।
