Supreme Court on SC Status: राजधानी दिल्ली समेत देश के सभी प्रमुख शहरों में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले की चर्चा है। दरअसल, उच्चतम न्यायालय की जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और एनवी अंजारिया की बेंच ने एक अहम फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट की इस बेंच ने साफ कर दिया है कि कोई भी व्यक्ति जो हिंदू धर्म, सिख धर्म या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म का पालन करता है।
ऐसे व्यक्ति को अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जा सकता। उच्चतम न्यायालय ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। ये फैसला एक ऐसे मामले में सामने आया है जिसमें व्यक्ति ने ईसाई धर्म अपनाने के बाद कुछ व्यक्तियों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया था।
धर्मांतरण पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला!
ईसाई धर्म अपनाकर वर्षों तक पादरी के रूप में काम करने वाले एक व्यक्ति ने कुछ लोगों ने खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया था। आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने जाति आधारित व्यवस्था को ईसाई धर्म से बाहर बताते हुए आरोपों को रद्द कर दिया था। इसको फिर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने भी प्रकरण में बड़ा फैसला सुनाया है।
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और एनवी अंजारिया की बेंच ने स्पष्ट किया है कि ईसाई धर्म अपनाने के बाद अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का दर्जा तत्काल समाप्त हो जाता है। अगर कोई व्यक्ति हिंदू धर्म, सिख धर्म या बौद्ध धर्म के अलावा किसी धर्म को स्वीकार करता है, तो वह अनुसूचित जाति समुदाय का सदस्य नहीं रह सकता।
किसी व्यक्ति द्वारा पहले ईसाई धर्म को अपना लेना। फिर अनुसूचित जाति का जिक्र कर एससी-एसटी एक्ट के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराना। न्यायालय को नागवार गुजरा है। सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल आरोपों को रद्द करते हुए तल्ख टिप्पणी की है और सारी तस्वीरें साफ कर दी हैं। उच्चतम न्यायालय की बेंच ने याचिका की सुनवाई करते हुए फटकार भी लगाई है।
एससी-एसटी एक्ट को लेकर न्यायालय ने खींची लकीर!
याचिका की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट को लेकर भी लकीर खींच दी है। न्यायालय की ओर से साफ तौर पर कहा गया है कि अनुसूचित जाति या जनजाति के सदस्य के रूप में मान्यता प्राप्त करने के लिए व्यक्ति का ऐसी जाति या जनजाति से संबंधित होना चाहिए।
जिसे संविधान आदेश के तहत विशेष रूप से अधिसूचित और मान्यता प्राप्त हो। उन्हें ही इसके तहत वैधानिक लाभ, सुरक्षा, आरक्षण या अन्य अधिकार प्राप्त हो सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को लेकर सुर्खियों में बाजार गर्म हैं और चर्चाएं की जा रही हैं।






