UGC New Rules Row: सुर्खियों का विषय बन चुका नया इक्विटी रूल लोगों के मन में कई तरह के सवाल खड़ा कर रहा है। कोई इसके फायदे जानना चाहता है, तो वहीं एक तबका है जो विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी यूजीसी के नए नियम की खामियों पर चर्चा कर रहा है। सवाल है कि कॉलेजों में जातिगत भेदभाव पर क्यों नए नियम लागू हुए हैं? ये क्यों बड़ा बदलाव माना जा रहा है? ऐसे में आइए हम आपको नए इक्विटी रूल के बारे में सबकुछ बताते हैं। इसके साथ ही ये भी बताते हैं यूजीसी के नए नियम को लेकर इतना हो-हल्ला क्यों मचा है।
कॉलेजों में जातिगत भेदभाव पर क्यों लागू हुए नए नियम?
इस सवाल का जवाब जानने के लिए हमें अतीत के पन्ने पलटने होंगे। बात 2016 की है जब तेलंगाना में छात्र रोहित वेमुला ने जातिगत भेदभाव का आरोप लगाते हुए आत्महत्या की थी। इसको लेकर खूब हो-हल्ला मचा। फिर मई 2019 में पायल ताडवी ने जातिगत भेदभाव का आरोप लगाते हुए आत्महत्या कर लिया। इन दोनों घटनाक्रमों ने देश में नए सिरे से चर्चा छेड़ दी और 29 अगस्त 2019 को सुप्रीम कोर्ट में इसके जातिगत भेदभाव के खिलाफ याचिका दाखिल हुई। इसके बाद कई सुनवाई हुई और अंतत: जस्टिस सूर्यकांत मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने यूजीसी को जातिगत भेदभाव को लेकर डेटा जुटाने और नियम बनाने का निर्देश दिया।
इस संदर्भ में फरवरी 2025 में ड्राफ्ट जारी हुआ और अब 13 जनवरी 2026 को जातिगत भेदभाव रोकने के लिए यूजीसी की ओर से नए नियम लागू किए गए हैं। नया नियम सभी कॉलेजों पर अनिवार्य है। इसे ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टिट्यूशन रेगुलेशन्स 2026’ नाम दिया गया है। यूजीसी का नया नियम कॉलेजों में जातीय भेदभाव को रोकने के लिए लागू किया गया है। नया नियम ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग से आने वाले छात्रों को जातिगत भेदभाव के आधार पर शिकाय करने का अधिकार देता है।
नए नियम के अंतर्गत क्या है बड़ा बदलाव?
यूजीसी ने नए नियम को सभी विश्वविद्यालों और उससे संबंद्ध कॉलेजों में लागू कर दिया है। नए नियम के मुताबिक सभी कॉलेजों में समान अवसर केंद्र (EOC) स्थापित किए जाएंगे। इसके साथ ही एक समानता समिति और समानता समूह बनाया जाएगा। ये तीनों मिलकर शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोकेंगे। पीड़ित छात्र नए नियम के तहत अपनी शिकायत समानता समिति से कर सकते हैं। 24 घंटे में समितियां कार्रवाई कर 15 दिनों के अंदर कॉलेज प्रमुख को रिपोर्ट सौंपेंगी। फिर कॉलेज प्रमुख 7 दिनों के भीतर आगे की कार्रवाई करेंगे। हर वर्ष इस कानून को लेकर समीक्षा होगी और इसके आधार पर कार्रवाई को रफ्तार मिलेगी।





