US-Iran Peace Talks: इस्लामाबाद बैकफुट पर है और तमाम तरह की आलोचना झेल रहा है। इसकी प्रमुख वजह है अमेरिका-ईरान के मध्य हुई बातचीत का बेनतीजा होना। दरअसल, पश्चिम एशिया में छिड़े संघर्ष को लेकर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची पाकिस्तान पहुंचे थे। यहां राजधानी इस्लामाबाद में शहबाज शरीफ ने मध्यस्थता पर जोर देकर शांति वार्ता के लिए पहल की।
हालांकि, बातचीत बेनतीजा रही और फिर तनावपूर्ण माहौल है। डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी का ऐलान किया। वैश्विक बाजार में उठा-पटक देखी जा रही है। इसका असर क्या भारत पर भी पड़ेगा? यदि पड़ेगा तो कैसे? आइए इन तमाम सवालों का जवाब ढूंढ़ने की कोशिश करते हैं। साथ ही मिडिल ईस्ट के वर्तमान हालात के बारे में बताते हैं।
कैसे US-Iran Peace Talks विफल होना भारत को कर सकता है प्रभावित?
स्पष्ट रूप से इस सवाल का जवाब देना अभी जल्दबाजी होगी। ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि अमेरिका-ईरान के मध्य इस्लामाबाद में विफल हुई बातचीत से भारत भी प्रभावित हो सकता है। जब अमेरिका-इजरायल-ईरान के बीच युद्ध जारी था। तब भारत पर भी इसका दंश नजर आया था। ऐसे में यदि फिर ये तीनों मुल्क टकराते हैं तो सबसे पहले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होगा। इससे भारत में ऊर्जा के तमाम स्रोत की सप्लाई प्रभावित होगी।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल फिर देखने को मिल सकता है। इससे भारतीय उद्योग जगत पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है। पेट्रोव-डीजल की कीमतों में यदि वृद्धि हुई, तो आम जनजीवन सीधी तौर पर प्रभावित होगा। इतना ही अनिश्चितता के कारण भारतीय शेयर बाजार में भी उतार-चढ़ाव आने की आशंका व्यक्त की जा रही है। वहीं भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव और खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों की सुरक्षा भी दांव पर लग सकती है। ये तमाम पहलु हैं जो प्रभावित हो सकते हैं।
इस्लामाबाद में बेनतीजा रही अमेरिका-ईरान की वार्ता
दुनिया की नजरें 11 अप्रैल को इस्लामाबाद पर टिकीं थी। दरअसल, उस दिन पाकिस्तान की राजधानी में अमेरिका और ईरान की सत्ता में काबिज कई शीर्ष नेता व सलाहकार पहुंचे थे। इस दौरान पश्चिम एशिया में छिड़े संघर्ष पर पूर्ण विराम लगाने की पहल की गई। हालांकि, दो मुल्कों के बीच हुई बातचीत बेनतीजा रही है। इस्लामाबाद से अमेरिकी और ईरानी डेलिगेशन अपने-अपने देश की ओर लौट चुके हैं।
ईरानी विदेश मंत्री अराघची और डोनाल्ड ट्रंप ने खुले तौर पर वार्ता विफल होने का जिक्र किया है। अमेरिका ने तो आक्रोशित भाव में होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह से ब्लॉक करने की धमकी तक दे दी है। ये दर्शाता है कि मिडिल ईस्ट पर फिर एक बार संकट के बादल मंडरा रहे हैं। इजरायल ने ईरान के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखने की बात कही है। वहीं वार्ता विफल होने के बाद अमेरिका भी जंग-ए-मैदान में आकर संघर्ष बढ़ा सकता है।





