UP Politics में ब्राह्मणों को रिझाने की कवायद! सरकार से क्या नाराज है वोटर्स का एक तबका? सपा-बसपा संग BJP भी मुहिम में जुटी

UP Politics में ब्राह्मणों की नाराजगी खूब खबरों में है। जानकारी के मुताबिक सपा-बसपा के साथ बीजेपी भी नाराज तबके को साधने में जुट गई है।

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Picture Credit: गूगल (सांकेतिक तस्वीर)

UP Politics: चुनाव भले ही अगले साल होने हैं, लेकिन समीकरण साधने का दौर अभी से शुरू है। यहां बात यूपी के संदर्भ में हो रही है जहां ब्राह्मणों को रिझाने की कवायद जारी है। कथित रूप से ब्राह्मणों का एक तबका वर्तमान सरकार ने नाराज बताया जा रहा है। पहले विधानसभा सत्र के दौरान ब्राह्मण विधायकों की बैठक पर प्रदेश अध्यक्ष की आपत्ति।

फिर माघ मेला के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद प्रकरण और फिर यूजीसी। इन सारे घटनाक्रमों को लेकर ब्राह्मण समुदाय सड़कों पर उतरा नजर आया। आलम ये है कि यूपी की सत्तारुढ़ बीजेपी के साथ सपा-बसपा भी ब्राह्मणों को रिझाने में जुट गए हैं। आइए आपको पूरे समीकरण के बारे में बताते हैं।

सरकार से क्या नाराज है वोटर्स का एक तबका?

कथित रूप से एक दावा तेजी से प्रसारित हो रहा है कि ब्राह्मण वोटर्स का एक तबका वर्तमान सरकार से नाराज है। तमाम मीडिया रिपोर्ट्स में भी इससे जुड़ी खबरें देखने को मिल जाएंगी। इसमें ब्राह्मण बनाम ठाकुर, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद प्रकरण, यूजीसी विवाद आदि का जिक्र किया जा रहा है। इससे इतर ब्राह्मण विधायकों की उस बैठक का भी जिक्र सामने आया है जो लखनऊ में विधायक पीएन पाठक के आवास पर हुई थी।

इसके बाद नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने ब्राह्मणों की बैठक पर आपत्ति जताई थी। यूपी पॉलिटिक्स पर नजर रखने वालों की मानें तो यह बहस किसी स्पष्ट राजनीतिक बदलाव की बजाय धारणाओं को लेकर अधिक है। यही वजह है कि ब्राह्मणों की नाराजगी सुर्खियां बटोर रही है। लखनऊ से गोरखपुर, गौतमबुद्धनगर तक मंथन का दौर भी इसी क्रम में जारी है।

सपा-बसपा के साथ BJP भी मुहिम में जुटी!

यूपी की सियासत पर नजर रखने वाले इस बात को बखूबी जानते होंगे कि कैसे सूबे में ब्राह्मणों को रिझाने की कवायद शुरू है। 10-12 फीसदी आबादी वाले समुदाय को सभी राजनीतिक दल अपने साथ लेने को आतुर हैं। इसके कई उदाहरण सामने आ चुके हैं। अभी हाल ही में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने अपने आवास पर 101 ब्राह्मण बटुकों को बुलाकर उन्हें सम्मानित किया था।

बसपा सुप्रीमो मायावती भी पहले ब्राह्मण विधायकों की बैठक, फिर ‘घुसखोर पंडत’ मूवी और यूजीसी के बहाने ब्राह्मणों को साधने का प्रयास करती नजर आईं। अखिलेश यादव भी पीडीए के साथ ब्राह्मणों को साधने का कोई प्रयास नहीं छोड़ रहे। यही वजह है कि बदले समीकरण में सपा-बसपा के साथ बीजेपी की मुहिम भी चर्चाओं में है।

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