उद्घाटन के बाद भी Noida International Airport से नहीं होगा फ्लाइटों का संचालन, केंद्र सरकार के फैसले से हड़कंप, जानें सबकुछ

Noida International Airport: पिछले महीने पीएम मोदी ने देश के सबसे चर्चित और एशिया के सबसे बड़े और खूबसूरत एयरपोर्ट का उद्घाटन किया था।

Noida International Airport

फाइल फोटो

Noida International Airport: पिछले महीने पीएम मोदी ने देश के सबसे चर्चित और एशिया के सबसे बड़े और खूबसूरत एयरपोर्ट का उद्घाटन किया था। हालांकि अब यात्रियों के लिए एक बुरी खबर सामने आ रही है। 1 महीना बीतने को है, लेकिन अभी भी  फ्लाइटों के संचालन को लेकर किसी प्रकार की जानकारी सामने नहीं आई है। इसकी वजह कोई छोटी-मोटी तकनीकी समस्या नहीं है बल्कि एक ऐसा मुद्दा है जो पिछले करीब 3 साल से लगातार बना हुआ है और अब तक इसका हल नहीं निकल सका है। दरअसल पूरा विवाद एयरपोर्ट के सीईओ को लेकर है। चलिए आपको बताते है इससे जुड़ी सभी अहम जानकारी।

इस वजह से नहीं होगा फ्लाइटों का संचालन

इस एयरपोर्ट को विकसित और संचालित करने वाली यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट पब्लिकेशन लिमिटेड स्विस कंपनी जरिच एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी की सहायक कंपनी है। एयरपोर्ट के सीईओ क्रिस्टोफ स्नेलमैन है जो विदेशी नागरिक हैं और यहीं से समस्या शुरू होती है क्योंकि भारत के नियम इसके विपरीत हैं। भारत के नियम के मुताबिक ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट का सीईओ भारतीय नागरिक होना जरूरी है।

यही वजह है कि फ्लाइटों को संचालन को लेकर अभी तक मंजूरी नहीं दी गई है। अब इसका सीधा-सीधा असर एयरपोर्ट के संचालन पर दिखाई देने लगा है। अब संकट कितना बड़ा है। स्थिति अब इतनी गंभीर हो चुकी है कि यह सिर्फ देरी का मामला नहीं बल्कि एक बड़ा ऑपरेशनल संकट बना हुआ है।

कब शुरू हो सकता है फ्लाइटों का संचालन – Noida International Airport 

गौरतलब है कि फ्लाइटों को संचालन को लेकर उठापटक जारी है। Noida International Airport का पिछले महीने ही उद्घाटन हो चुका है। एक महीना का समय पूरा होने वाला है, लेकिन फ्लाइटों का संचालन में और देरी हो सकती है। जो यात्रियों के लिए एक चिंता का विषय बना हुआ है। दूसरी तरफ उड़ानों का शुरू ना होना सरकारी तैयारी और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को भी उजागर करता है। यह सिर्फ एक एयरपोर्ट के संचालन में देरी की कहानी नहीं है बल्कि इससे बड़ा मुद्दा विदेशी निवेश और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन का है। एक तरफ अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की भागीदारी है तो वहीं दूसरी तरफ देश के सुरक्षा के नियम।

 

 

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