Muskan Sahil Case: पति को नीले ड्रम में भरने वाली मुस्कान और साहिल के पास बचे हैं 4 रास्ते, जानें कैसे बच सकते हैं?

Muskan Sahil Case: प्रेमी साहिल के साथ मिलकर पति को नीले ड्रम में बंद करके मौत के घाट उतारने वाली मुस्कान को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है। लेकिन अभी दोनों के पास मौत से बचने के चार रास्ते हैं।

Muskan Sahil Case

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Muskan Sahil Case:  उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में पति को प्रेमी संग मारकर नीले ड्रम में भरने वाली मुस्कान और उसके प्रेमी को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है। ये फैसला मेरठ जिला एवं सत्र न्यायालय के जिला जज अरविंद कुमार मिश्र के द्वारा सुनाया गया है। जैसे ही मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को मौत की सजा हुई वैसे ही ये केस ट्रेंड करने लगा। पति सौरभ राजपूत को खौफनाक मौत देने वाले मुस्कान और साहिल के पास अभी बचने के चार मौके हैं। आपको बता दें, मुस्कान ने अपने पति सौरभ को 3 मार्च 2025 की रात को यूपी मेरठ केब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र के इंद्रानगर में स्थित अपने घर पर ही मारा था।

इलाहाबाद हाई कोर्ट पलट सकता है Muskan Sahil Case का फैसला

मेरठ कोर्ट के द्वारा सुनाया गया फैसला चार तरीकों से पलटा जा सकता है। दोषी मुस्कान और साहिल के पास सजा के खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट जाने का रास्ता है। उत्तर प्रदेश के हाई कोर्ट में अपील और डेथ रेफरेंस दे सकते हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट इस फैसले को उम्र कैद में बदल सकता है।

सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं मुस्कान और साहिल

अगर दिल्ली हाई कोर्ट भी फांसी की सजा को बरकरार रखता है, तो दोनों दोषी देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट में मुस्कान और साहिल जा सकते हैं। अगर सुप्रीम कोर्ट इस फैसले को ऐसे ही रखता है तो, दोनों फैसले पर दोबारा विचार करने के लिए रिव्यू पिटीशन दाखिल कर सकते हैं।

क्यूरेटिव पिटीशन फांसी की सजा रोक सकती है

फांसी से बचने के लिए साहिल और मुस्कान क्यूरेटिव पिटीशन का सहारा ले सकते हैं। यह सुप्रीम कोर्ट में कानूनी तौर पर बचने का आखिरी अदालती रास्ता होता है। जिसमें दोनों बच सकते हैं।

भारत के राष्ट्रपति के पास जाने का आखिरी रास्त

पति सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में अगर सभी कोर्ट फांसी सजा को बरकरार रखती हैं तो, अनुच्छेद 72  के तहत भारत के राष्ट्रपति के पास दया याचिका भेजने का अधिकार होता है। अगर यहां से उन्हें माफी मिल जाती है तो फांसी से बच सकते हैं। 

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