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CM Yogi Adityanath ने जारी किया संदेश! देश की पहली महिला शिक्षिका को नमन कर बताया समतामूलक समाज की शिल्पकार 

CM Yogi Adityanath ने आज देश की पहली महिला शिक्षिका व समाज सुधारक सावित्रीबाई फुले की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन किया है।

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By: Gaurav Dixit

Published: मार्च 10, 2026 2:48 अपराह्न

CM Yogi Adityanath
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CM Yogi Adityanath: यूपी के साथ देश के विभिन्न हिस्सों में आज सावित्रिबाई फुले की पुण्यतिथि मनाई जा रही है। इतिहास में दिलचस्पी रखने वाले लोग जरूर इस नाम से वाकिफ होंगे। कैसे नारी चेतना का प्रखर स्वर बनते हुए सावित्रिबाई फुले ने देश में ज्ञान की दीपक जलाई ये अपने आप में एक इतिहास है।

इस खास दिन पर प्रतिक्रियाओं के दौर के बीच सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी संदेश जारी किया है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने सावित्रिबाई फुले को नमन करते हुए उन्हें समतामूलक समाज की शिल्पकार बताया है। यूपी सीएम की प्रतिक्रिया को लेकर खूब सुर्खियां भी बन रही हैं।

सावित्रीबाई फुले की पुण्यतिथि पर CM Yogi Adityanath की प्रतिक्रिया!

देश की प्रथम शिक्षिका के रूप में विख्यात सावित्रीबाई फुले की 129वीं पुण्यतिथि मनाई जा रही है। इस खास अवसर पर लोग समाज सुधारव व मराठी कवयित्री को नमन कर रहे हैं।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी उन्हें नमन करते हुए श्रद्धा-सुमन अर्पित किया है। मुख्यमंत्री के आधिकारिक एक्स हैंडल से पोस्ट जारी कर लिखा गया है कि “नारी चेतना की प्रखर स्वर, समतामूलक समाज की शिल्पकार एवं आधुनिक भारत की प्रथम महिला शिक्षिका, ‘क्रांतिज्योति’ सावित्रीबाई फुले की पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि।” यहां समतामूलक समाज की शिल्पकार का आशय एक ऐसे समाज के निर्माण से है जहां सभी को समान अधिकार, अवसर और सम्मान प्राप्त हो।

लड़कियों के लिए पहला स्कूल खोलकर जलाई थी शिक्षा की लौ!

समाज सुधारक सावित्रीबाई फुले ने 1848 में लड़कियों के लिए पहला स्कूल खोलकर शिक्षा की लौ जलाने का काम किया था। 9 वर्ष की उम्र में 13 वर्षीय ज्योतिराव फुले से ब्याही गई सावित्रीबाई फुले ने पति के साथ मिलकर शिक्षा हासिल की। पहले खुद पढ़ना-लिखना सीखा। फिर उन्होंने शिक्षा के महत्व को समझते हुए पुणे में लड़कियों को पढ़ाना शुरू किया।

सावित्रीबाई फुले ने आगे चलकर विधवा विवाह, बाल विवाह और सती प्रथा के खिलाफ भी आवाज उठाई। फिर समय बीता और 1853 में उन्होंने गर्भवती बलात्कार पीड़ितों और बेसहारा महिलाओं के लिए ‘बालहत्या प्रतिबंधक गृह’ नामक आश्रम खोला। उनके उन योगदानों को आज भी याद किया जाता है। अंतत: संघर्ष करते हुए ही 10 मार्च 1897 को उनकी मौत हुई। इसी दिन पर सावित्रीबाई फुले की पुण्यतिथि मनाई जाती है।

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Gaurav Dixit

गौरव दीक्षित पत्रकारिता जगत के उभरते हुए चेहरा हैं। उन्होनें चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से अपनी पत्रकारिता की डिग्री प्राप्त की है। गौरव राजनीति, ऑटो और टेक संबंघी विषयों पर लिखने में रुची रखते हैं। गौरव पिछले दो वर्षों के दौरान कई प्रतिष्ठीत संस्थानों में कार्य कर चुके हैं और वर्तमान में DNP के साथ कार्यरत हैं।
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