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Waqf Act in Supreme Court: क्या SC पर्लियामेंट द्वारा पारित कानूनों को रद्द कर सकता है? जानें नियम और पुराने मामलों पर हुई सुनवाई से जुड़े डिटेल

Waqf Act in Supreme Court को लेकर छिड़ी चर्चा के बीच बड़ा सवाल ये है कि क्या न्यायपालिका संसद से पारित कानून को रद्द कर सकती है? इस सवाल का जवाब हम विस्तार से देंगे और पुराने कुछ मामलों का जिक्र कर बताएंगे कि कैसे सुप्रीम कोर्ट पूर्व में संसद से पारित कानूनों को रद्द कर चुका है।

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By: Gaurav Dixit

Published: अप्रैल 16, 2025 11:03 पूर्वाह्न

Waqf Act in Supreme Court
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Waqf Act in Supreme Court: राजनीतिक बयानबाजी तेज होने के साथ सुप्रीम कोर्ट परिसर में हलचल है। इसकी खास वजह है कि संसद से बीते दिनों पारित हुआ वक्फ कानून। दरअसल, 2 और 3 अप्रैल के दरम्यान लोकसभा, राज्यसभा से वक्फ बिल पारित होकर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद कानून बन गया, जिसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। अलग-अलग आधार पर याचिकाकर्ताओं ने याचिका दाखिल कर Waqf Act को रद्द करने की मांग की है। Waqf Act in Supreme Court आज चहुंओर सुर्खियां बटोर रहा है। इसको लेकर तमाम कयासबाजी भी जारी है। हालांकि, बड़ा सवाल ये है कि क्या SC पर्लियामेंट द्वारा पारित कानूनों को रद्द कर सकता है? तो आइए हम इस सवाल का जवाब ढूंढ़ने की कोशिश करते हैं। साथ ही कुछ पुराने मामलों का जिक्र भी करते हैं जिसमें संसद से पारित कानूनों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।

क्या SC पर्लियामेंट द्वारा पारित कानूनों को रद्द कर सकता है?

इस सवाल का जवाब हां हैं, लेकिन उसके लिए तय प्रक्रिया और मजबूत आधार होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट तब ही संसद से पारित किसी भी कानून को खत्म कर सकता है जब कानून देश के संविधान में जो प्रावधान हैं उसका उल्लंघन करता हो। या फिर यदि कानून मौलिक अधिकार या संविधान की मूल भावना के खिलाफ हो। ऐसी स्थिति में सुप्रीम कोर्ट किसी भी कानून को असंवैधानिक घोषित कर उसे खत्म करने की शक्ति रखता है।

संसद से पारित किन-किन कानून को सुप्रीम कोर्ट में मिली चुनौती?

यूं तो ऐसे कितने ही कानून हैं जिन्हें सरकार लोकसभा, राज्यसभा से पारित करा लेती है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में उस कानून को चुनौती दी जाती है। हालिया कुछ उदाहरण हैं जिन्हें हम आपसे साझा करेंगे। थोड़ा फ्लैशबैक में जाएंगे तो आधार अधिनियम 2016 का उदाहरण मिलेगा। कैसे Supreme Court ने इस कानून को संसद से पारित होने के बाद इसकी वैधानिकता को बरकरार रखा था। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यह अधिनियम अनुच्छेद 21 के तहत निजता के अधिकार का उल्लंघन करता है। कोर्ट ने निजी संस्थाओं द्वारा आधार डेटा के उपयोग को अमान्य कर, कुछ सेवाओं के लिए आधार को अनिवार्य करने की सीमा तय करते हुए इसकी वैधानिकता बरकरार रखी थी।

अतीत के पन्ने पलटें तो राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) अधिनियम, 2014 का जिक्र मिलता है। संसद से पारित इस कानून को सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में असंवैधानिक करार देकर खारिज कर दिया और कॉलेजियम प्रणाली बहाल हुई। चुनावी बांड योजना, 2017 भी उन कानूनों में एक है जिसे संसद से पारित करने के बाद सुप्रीम कोर्ट में चुनौती मिली। इसके बाद SC ने 2024 में योजना को असंवैधानिक घोषित कर दानकर्ताओं की जानकारी सार्वजनिक करने का आदेश दिया। जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 पर भी ऐसा ही हुआ। कोर्ट में इस कानून को चुनौती मिलने के बाद इसे वैध ठहराया गया। कृषि कानून, 2020 का उदाहरण भी ले सकते हैं जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाकर एक समिति गठित की थी और अंतत: संसद ने इन्हें रद्द कर दिया था। ऐसे में ये ऐसे कानून हैं जिन्हें पारित होने के बाद SC में चुनौती दी गई थी।

Waqf Act in Supreme Court नए-नवेले वक्फ एक्ट को लेकर तेज हुई सरगर्मियां

ये एक ऐसा कानून है जिसके खिलाफ देश की सड़कों पर नारे जलग रहे हैं। एक ओर मुसलमान वक्फ एक्ट को धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप बता रहे हैं। वहीं कांग्रेस, राजद, सपा, जेएमएम समेत अनेक क्षेत्रीय व राष्ट्रीय पार्टियां हैं जो Waqf Act के खिलाफ मुखरता से आवाज उठा रही हैं। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिमों की नियुक्ति, अनुच्छेद-26 यानी धार्मिक संपत्तियों के प्रबंधन के अधिकार का उल्लंघन है। इसके अलावा दानदाता को 5 साल से अधिक मुस्लिम होने की शर्त और गैर-मुस्लिमों को वक्फ के माध्यम से दान से वंचित करना याचिकाकर्ताओं का मुख्य आधार है। याचिकाकर्ता हिन्दू और सिख धर्मों की संपत्तियों के प्रबंधन में सरकार का हस्तक्षेप न होने का जिक्र कर भी Waqf Act को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट आज इस मामले में पहले दिन सुनवाई करेगा।

ध्यान देने योग्य बात है कि यदि कोर्ट वक्फ एक्ट को रद्द भी कर देती है, तो संसद के पास विकल्प खुले रहते हैं। पुराने मामलों की बात करें तो 1961 में आरक्षण से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को अध्यादेश लाकर संसद ने पलट दिया था। संसद ने कोर्ट के फैसले के खिलाफ 1961 में संविधान में संशोधन किया गया था और कुछ क्लॉज जोड़ कर कानून को लागू किया। ऐसे में यदि Waqf Act in Supreme Court रद्द भी हो जाता है, तो संसद के समक्ष विकल्प का द्वार खुला रहेगा।

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Gaurav Dixit

गौरव दीक्षित पत्रकारिता जगत के उभरते हुए चेहरा हैं। उन्होनें चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से अपनी पत्रकारिता की डिग्री प्राप्त की है। गौरव राजनीति, ऑटो और टेक संबंघी विषयों पर लिखने में रुची रखते हैं। गौरव पिछले दो वर्षों के दौरान कई प्रतिष्ठीत संस्थानों में कार्य कर चुके हैं और वर्तमान में DNP के साथ कार्यरत हैं।
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