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Dussehra 2024: पहला रावण दहन और पाकिस्तान कनेक्शन?

Dussehra 2024: देश के अलग-अलग हिस्सों में आज 12 अक्टूबर को विजयादशमी (Vijayadashami) यानी दशहरा पर्व बड़े धूम-धाम से मनाया जा रहा है। इस दौरान बड़े-बड़े मैदान में रामलीला का आयोजन किया जाता है जिसे देखने हजारों की संख्या में लोग आते हैं।

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By: Gaurav Dixit

Published: अक्टूबर 12, 2024 4:50 अपराह्न

Dussehra 2024
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Dussehra 2024: देश के अलग-अलग हिस्सों में आज 12 अक्टूबर को विजयादशमी (Vijayadashami) यानी दशहरा पर्व बड़े धूम-धाम से मनाया जा रहा है। इस दौरान बड़े-बड़े मैदान में रामलीला का आयोजन किया जाता है जिसे देखने हजारों की संख्या में लोग आते हैं। दशहरा पर्व (Dussehra 2024) के दिन ही रावण दहन (Ravan Dahan) का भी चलन है। दरअसल लोग रावण का पुतला बनाकर इसे जलाते हैं और असत्य पर सत्य की विजय वाले इस त्योहार को हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। दशहरा के दिन होने वाले रावण दहन का पाकिस्तान कनेक्शन (Ravan Dahan Pakistan Connection) होने की बात भी कही जाती है। नवभारत टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार बात करें तो भारत में सैकड़ों वर्ष पहले रावण दहन का चलन नहीं था।

रावण दहन की शुरुआत आजादी के बाद से होने का दावा किया जाता है। जानकारी के मुताबिक भारत में पहले रावण दहन (Ravan Dahan on Dussehra) की शुरुआत झारखंड की राजधानी रांची (Ranchi) से 1948 में हुई जो कि तब बिहार का हिस्सा था। उस दौरान बंटवारे के बाद पाकिस्तान से हजारों की संख्या में शरणार्थी भारत आए थे जिन्होंने इस परंपरा की छोटी सी शुरुआत की थी। हालाकि बीतते समय के साथ ‘रावण दहन’ कार्यक्रम का विस्तार हुआ और आज देश के विभिन्न हिस्सों में दशहरा के दिन रावण के पुतले में आग लगाकर दहन किया जाता है।

Dussehra 2024- ‘रावण दहन’ का पाकिस्तान कनेक्शन

भारत में दशहरा (Dussehra 2024) के दिन पहले रावण दहन (Ravan Dahan) नहीं होता था। इसकी शुरुआत आजादी के बाद से होने का दावा किया जाता है। नवभारत टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत-पाकिस्तान बंटवारे के बाद पड़ोसी मुल्क से लाखों की संख्या में शरणार्थी भारत के अलग-अलग हिस्सों में आए। इसमें ज्यादा संख्या हिंदुओं की थी। पाकिस्तान से रांची पहुंचे शरणार्थियों ने दशहरा के दिन रावण दहन (Ravan Dahan Pakistan Connection) की शुरुआत 1948 में की थी।

बीतते समय के साथ रावण दहन (Ravan Dahan on Dussehra) का चलन तेजी से बढ़ा और ये राजधानी दिल्ली के साथ देश के अलग-अलग हिस्सों में होने लगा। दिल्ली में रावण दहन (Ravan Dahan in Delhi) की शुरुआत 1953 में हुई जो कि आज भी जारी है। वर्तमान की बात करें तो अब दशहरा के दिन रावण दहन की परंपरा नितांत आवश्यक प्रक्रियाओं में से एक है। विभिन्न शहरों में लोग रावण दहन देखने के लिए अपने घरों से कोसो दूर लगे मेले में जाते हैं और रावण दहन देख दशहरा पर्व को उल्लास के साथ मनाते हैं।

Vijayadashami का खास महत्व

नवरात्रि (Navratri 2024) के समापन या यूं कहें कि अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाए जाने वाले पर्व दशहरा का बेहद खास महत्व है। दशहरा को विजयादशमी (Vijayadashami) भी कहते हैं जो कि सनातन संस्कृति (Sanatana Dharm) में जन्म लेने वालों के लिए महत्वपूर्ण है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस पर्व को असत्य, बुराई, अहंकार और अधर्म पर धर्म, सत्य और न्याय की विजय का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि आज के दिन ही हजारों वर्ष पहले भगवान राम (Lord Ram) ने रावण का और देवी दुर्गा (Devi Durga) महिषासुर नामक राक्षस का वध किया था। ऐसे में लोग प्रभु राम और देवी दुर्गा की अराधना कर इस पर्व को खुशी के साथ मनाते हैं।

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Gaurav Dixit

गौरव दीक्षित पत्रकारिता जगत के उभरते हुए चेहरा हैं। उन्होनें चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से अपनी पत्रकारिता की डिग्री प्राप्त की है। गौरव राजनीति, ऑटो और टेक संबंघी विषयों पर लिखने में रुची रखते हैं। गौरव पिछले दो वर्षों के दौरान कई प्रतिष्ठीत संस्थानों में कार्य कर चुके हैं और वर्तमान में DNP के साथ कार्यरत हैं।
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