Mahashivratri 2026: देश के विभिन्न हिस्सों में आज महाशिवरात्रि धूम-धाम से मनाई जा रही है। इस दौरान उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर मंदिर से लेकर वाराणसी काशी विश्वनाथ, देवघर में बाबा बैजनाथ धाम तक भक्तों की लंबी कतारें लगी हैं। शिवभक्त प्रात: स्नान ध्यान कर ब्रह्म मुहूर्त में ही भगवान भोलेनाथ की पूजा के लिए शिवालयों तक पहुंच रहे हैं।
शिवभक्तों के हाथ में जल, दूध, दुर्बा, फल, दही समेत पूजन के तमाम सामान हैं। महाशिवरात्रि 2026 पर शिवालयों में हर-हर महादेव नारे की गूंज है। ऐसे में आइए हम आपको विशेष पूजन विधि के साथ शिवरात्रि व्रत के बारे में बताते हैं। साथ ही ये भी बताते हैं कि भगवान भोलेनाथ को क्या अर्पित करने से विशेष कृपा बरसने की मान्यता है।
महाशिवरात्रि पर व्रत के साथ पूजन विधि जान भोलेनाथ को अर्पित करें ये चीजें
आज यानी 15 फरवरी को देश भर में महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जा रहा है। इस दौरान लोग भगवान शिव के प्रति आस्था रखते हुए व्रत हैं। व्रत के दौरान फलाहार का सेवन करना होता है। अगले दिन 16 फरवरी को सुबह 6:42 से लेकर दोपहर 3:10 के बीच पारण किया जाएगा। व्रत से इतर महाशिवरात्रि पर पूजन विधि जानना जरूरी है। शिवभक्त आज के दिन भगवान भोलेनाथ को जल, दूध, दही, शक्कर, घी और गन्ने का रस अर्पित करें।
इस दौरान ऊं नम: शिवाय, ह्रीं ईशानाय नमः, ह्रीं अघोराय नम: जैसे मंत्रों का उच्चारण करें। इससे इतर भगवान भोलेनाथ को बेलपत्र, भांग, धतूरा व शमी का फूल, बेर, फल, मिठाई आदि वस्तु अर्पित करें। मान्यता है कि ऐसा करने से शिवभक्तों को भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इन वस्तुओं को अर्पित कर आप भोलेनाथ भगवान के समक्ष चालीसा और आरती पढ़ पूजन प्रक्रिया को पूरी कर सकते हैं।
वाराणसी से उज्जैन, देवघर तक Mahashivratri 2026 पर भक्तों का मजमा!
धूम-धाम से मनाई जा रही महाशिवरात्रि पर आज भगवान भोलेनाथ की नगरी काशी में श्रद्धालुओं का मजमा लगा है। इतना ही नहीं, उज्जैन, नासिक, देवघर, द्वारका, रामेश्वरम समेत अन्य तमाम शहरों में भी शिवभक्त ज्योतिर्लिंग का दर्शन-पूजन करने पहुंचे हैं। शिवालय हर-हर महादेव और ऊं नम: शिवाय की गूंज से गूंजयमान हैं। शिवभक्तों के भीतर इस अद्भुत ऊर्जा को देख लोग खुश हो रहे हैं और एक-दूसरे को महाशिवरात्रि पर्व की बधाई दे रहे हैं।
नोट– शिवरात्रि पर पूजन का पहला चरण 15 फरवरी की शाम 6:20 से 9:20 तक है। दूसरा चरण रात 9:21 से 11:21 तक। तीसरा चरण रात 12:22 से 3:22 तक। चौथा चरण प्रात: 3:23 से 6:23 तक। इन चारों पहर में पूजन का विशेष महत्व है।
Disclaimer: यहां साझा की गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिलता है। डीएनपी इंडिया/लेखक इन बातों की सत्यता का प्रमाण नहीं प्रस्तुत करता है।






