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Makar Sankranti 2026 पर तिल, गुड़, खिचड़ी और तेल समेत इन वस्तुओं का दान करने से बदल सकती है दशा! पूजन विधि के साथ शुभ मुहूर्त भी जानें

Makar Sankranti 2026 पर लोग तिल, गुड़, तेल, खिचड़ी, गाय का घी, अनाज समेत अन्य तमाम वस्तुओं का दान कर सकते हैं। मान्यता है कि मकर संक्रांति पर ऐसा करने से दशा सुधरती है। इस दिन खास तौर पर सूर्य देवता की पूजा भी विधि-विधान के साथ होती है।

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By: Gaurav Dixit

Published: जनवरी 13, 2026 5:49 अपराह्न

Makar Sankranti 2026
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Makar Sankranti 2026: नए साल के प्रथम पर्व को देश की जनता धूम-धाम से मनाती है। उत्तर भारत में प्रमुख तौर पर इसे मकर संक्रांति के रूप में जाना जाता है। इस दिन लोग प्रात: स्नान-ध्यान कर सूर्य देव की अराधना करते हैं। अबकी बार 2026 में मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा। दरअसल, 14 जनवरी को षटतिला एकादशी पड़ रही है जिस वजह से चावल का सेवन या उसका स्पर्श नहीं किया जाएगा। यही वजह है कि द्वादशी तिथि में 15 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई जाएगी। इस दिन लोग तिल, गुड़, खिचड़ी, तेल, अनाज और कंबल आदि का दान कर सकते हैं जो उनकी दशा बदलने में कारगर साबित हो सकती है। आइए हम आपको मकर संक्रांति के दिन की शुभ मुहूर्त और पूजा विधि बताते हैं।

तिल, गुड़, खिचड़ी और तेल का दान करने से बदल सकती है दशा!

वर्ष के प्रथम पर्व मकर संक्रांति पर कई वस्तुओं का दान किया जाता है। लोग स्नान-ध्यान कर प्रात: काले तिल और तेल का दान करते हैं जिससे शनि देव को प्रसन्न करने की मान्यता है। संक्रांति के दिन खिचड़ी का दान और सेवन भी शुभ माना जाता है। गुड़ का दान करने से अराध्य देव सूर्य का आशीर्वाद मिलने की मान्यता है। इससे इतर अनाज, कंबल, गाय का घी, सप्तधान्य, वस्त्र, रेवड़ी, चावल, सब्जियां आदि का दान भी प्रमुख है जो मकर संक्रांति के दिन लोग करते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से लोगों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उनकी दशा बदलती है।

मकर संक्रांति 2026 पर जानें पूजन विधि और शुभ मुहूर्त

ज्योतिष विद्वानों ने साफ कर दिया है कि मकर संक्रांति का पर्व इस वर्ष 15 जनवरी को धूम-धाम से मनाया जाएगा। इस दिन से सूर्य देवता दक्षिणायण से उत्तरायण की ओर गति करेंगे। मकर संक्रांति पर पुण्यकाल 15 जनवरी की सुबह ब्रह्म मुहूर्त से लेकर सुबह 8 बजे तक रहेगा। लोग दोपहर 12 बजे तक भी धूम-धाम के साथ संक्रांति का पर्व मना सकते हैं। इस दौरान सूर्य देव की पूजा होगी। प्रात: स्नान-ध्यान कर तांबे के लोटे में लाल रंग का फूल और चंदन डालकर भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया जा सकता है। इसके बाद लोग अपने पूर्वजों के नाम संकल्प भी करते हैं और मनचाही वस्तुओं का दान कर सकते हैं। तत्पश्चात काले तिल, खिचड़ी आदि का सेवन कर मकर संक्रांति का पर्व धूम-धाम से मनाया जा सकता है।

Disclaimer: यहां साझा की गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिलता है। डीएनपी इंडिया/लेखक इन बातों की सत्यता का प्रमाण नहीं प्रस्तुत करता है।

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Gaurav Dixit

गौरव दीक्षित पत्रकारिता जगत के उभरते हुए चेहरा हैं। उन्होनें चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से अपनी पत्रकारिता की डिग्री प्राप्त की है। गौरव राजनीति, ऑटो और टेक संबंघी विषयों पर लिखने में रुची रखते हैं। गौरव पिछले दो वर्षों के दौरान कई प्रतिष्ठीत संस्थानों में कार्य कर चुके हैं और वर्तमान में DNP के साथ कार्यरत हैं।
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