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Pushya Nakshtra 2024: कब है गुरू पुष्य नक्षत्र? किन चीजों की खरीदारी के लिए माना जाता है शुभ, यहां जानें इसका महत्व

Pushya Nakshtra 2024: सनातन धर्म में पुष्य नक्षत्र को बहुत अधिक महत्व दिया गया है। पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रों को राजा कहा गया है। ऐसे में यह योग गुरूवार को बन रहा है। साथ ही इसको सोने पर सुहागा जैसा माना जा रहा है। वहीं, इस साल यह 22 फरवरी 2024 को गुरू पुष्य नक्षत्र ...

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By: DNP न्यूज़ डेस्क

Published: फ़रवरी 18, 2024 3:03 अपराह्न

Pushya Nakshtra 2024
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Pushya Nakshtra 2024: सनातन धर्म में पुष्य नक्षत्र को बहुत अधिक महत्व दिया गया है। पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रों को राजा कहा गया है। ऐसे में यह योग गुरूवार को बन रहा है। साथ ही इसको सोने पर सुहागा जैसा माना जा रहा है। वहीं, इस साल यह 22 फरवरी 2024 को गुरू पुष्य नक्षत्र रहेगा। इस दिन सोना-चांदी, भूमि, वाहन आदि चीजों की खरीदारी करने से सफलता और समृद्धि मिलती है।

Pushya Nakshtra 2024 (शुभ तिथि-मुहूर्त)

गुरू पुष्य नक्षत्र की शुरूआत 22 फरवरी को सूर्योदय से होगी। जिसकी समाप्ति सायं 4:43 मिनट पर होगी। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि, अमृत​ सिद्धि, रवि योग, सौभाग्य और शोभन योग का संयोग भी बन रहा है।

Pushya Nakshtra 2024 का महत्व

बताया जाता है कि, सत्ताइस नक्षत्रों में पुष्य आठवां नक्षत्र है। इस ​नक्षत्र में इसे सबसे अच्छा माना जाता है। पुष्य नक्षत्र के दौरान चंद्रमा कर्क राशि में​ स्थित होता है। बारह राशियों में एकमात्र कर्क राशि का स्वामी चंद्रमा है। वहीं, चंद्रमा अन्य किसी ​राशि का स्वामी नहीं है।

चंद्रमा धन, सोना, चांदी और नए सामानों की खरीदारी के लिए पुष्य नक्षत्र को सबसे पवित्र माना जाता है। इसमें विवाह को छोड़कर सभी कार्य किए जाते हैं। इस शुभ योग में शुरू किया गया कारोबार खूब फलता है।

Pushya Nakshtra 2024 के दिन करें ये कार्य

  • शास्त्रों के मुताबिक, गुरू पुष्य योग में पारद लक्ष्मी घर में स्थापित करना बहुत शुभ माना गया है। इससे बरक्कत का वास होता है। धन की कमी दूर होती है।
  • गुरू पुष्य नक्षत्र पर बृहस्पति और शनि का अधिपत रहता है, गुरू बृहस्पति का शुभ आशीर्वाद पाने के लिए उनसे संबंधित चीजें खरीद सकते हैं। जैसे की पीतल के पात्र, पील रंग के वस्त्र, सोने के आभूषण आदि।
  • यह पुष्य नक्षत्र स्थायी है जो लोग इस तिथि के ​दौरान कोई भी चीज खरीदते हैं। उस वस्तु का अस्तित्व लंबे समय तक के लिए बना रहता है।
  • पुष्य नक्षत्र में मंत्र दीक्षा, यज्ञ अनुष्ठान, उच्च शिक्षा ग्रहण करना, आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करना, भूमि क्रय—विक्रय, और वेद पाठ आरंभ करना श्रेष्ठ माना जाता है।

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