CJI Surya Kant: TISS के 86वें दीक्षांत समारोह में चीफ जस्टिस नहीं होंगे मुख्य अतिथि,जानें आखिरी समय में क्यों बदला फैसला

CJI Surya Kant: टीआईएसएस के 86वें दीक्षांत समारोह में सीजेआई सूर्यकांत अब मुख्य अतिथि नहीं होंगे। इस कार्यक्रम में टाटा मेमोरियल अस्पताल के निदेशक डॉ. सी. एस. प्रमेश को मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया गया है।

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CJI Surya Kant: टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज यानी टीआईएसएस 22 अगस्त को अपना 86वां कॉन्वोकेशन सेरेमनी आयोजित करने वाला है। इस दीक्षांत समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत को मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया था। हालांकि, टीआईएसएस प्रशासन ने अंतिम समय में फैसला बदला लिया है। अब 22 अगस्त को आयोजित होने वाले समारोह में टाटा मेमोरियल अस्पताल के निदेशक डॉ. सी. एस. प्रमेश को मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया गया है।

TISS में 2 अगस्त को होना था दीक्षांत समारोह

मालूम हो कि इससे पहले टीआईएसएस के 86वें दीक्षांत समारोह में भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत को मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया था, लेकिन उनके कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर सामने आए घटनाक्रम के बाद समारोह को अंतिम समय पर स्थगित कर दिया गया था। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो  टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज  की ओर से 2 अगस्त को समारोह आयोजित होने से ठीक 48 घंटे पहले एक ईमेल संदेश के जरिए कहा गया कि “अचानक उत्पन्न हुए हालात” की वजह से दीक्षांत समारोह का कार्यक्रम टाल दिया गया है। जिसको लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ा रहा। इन सबके बीच बड़ी खबर यह है कि टीआईएसएस 22 अगस्त को अपना 86वां दीक्षांत समारोह आयोजित करने जा रहा है। जिसको लेकर इंस्टीट्यूट प्रशासन द्वारा सभी तैयारी पूरी कर ली गई है। इस दीक्षांत समारोह में टाटा मेमोरियल अस्पताल के निदेशक डॉ. सी. एस. प्रमेश मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे।

सीजेआई सूर्यकांत के कार्यक्रम में नहीं आने पर स्थिति साफ नहीं

बता दें कि टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज कैंपस के सूत्रों की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, इंस्टीट्यूट प्रशासन ने कार्यक्रम के दौरान विरोध या दूसरी रुकावट डालने वाली गतिविधियों के डर से दीक्षांत समारोह के कार्यक्रम को टाल दिया था। सूत्र इसके पीछे की वजह बताते हैं कि सीजेआई सूर्यकांत का बेरोजगार युवा भारतीयों को “कॉकरोच” कहना देश भर में हाल ही में हुए बड़े छात्र आंदोलन से जुड़ा समझा जाता रहा है। हालांकि, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज ने इस संबंध में अबतक आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। इसको लेकर भी चर्चा का बाजार गर्म है।

 

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