Fatty Liver: ये कर लिया तो फैटी लीवर के साथ खत्म हो जाएगा बेली फैट, डॉक्टर ने बताया अचूक उपाय

Fatty Liver: फैटी लीवर पूरे शरीर की हेल्थ पर असर डालता है। स्थिति बिगड़ने पर ये मरीज की जान तक ले सकता है। इसी गंभीर बीमारी से  बचने और बेली फैट को कम करने का तरीका डॉक्टर के  द्वारा बताया जा रहा है।

fatty liver

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Fatty Liver: लीवर शरीर का बेहद महत्वपूर्ण अंग है. ये शरीर में ब्लड को फिल्टर करके गंदगी को बाहर फेंकता है. लेकिन अगर इस पर चर्बी जमना शुरु हो जाए तो फैटी लीवर हो जाता है. इसका गंभीर रुप मरीज की जान ले सकता है। काफी लोगों को इसकी हालत बिगड़ने के बाद ही पता चलता है। डॉक्टर सलीम जैदी का कहना है कि,पेट की चर्बी एक वार्निंग साइन है। अक्सर हमें लगता है कि यह सिर्फ एक कॉस्मेटिक प्रॉब्लम है जो बॉडी शेप को खराब कर रही है। लेकिन सच यह है कि पेट का बढ़ना कई बड़ी-बड़ी बीमारियों को खुला न्योता देने जैसा है। जिसमें से एक बहुत ही कॉमन प्रॉब्लम होती है फैटी लीवर। अगर आपका पेट निकला हुआ है बाहर की तरफ तो 90% चांसेस हैं कि आपका लिवर भी अंदर से फैटी हो चुका है।

फैटी लीवर कैसे होता है?

अक्सर लोग सोचते हैं कि ज्यादा तेल घी खाने से लीवर में फैट जमा हो जाता है। लेकिन सच यह है कि लीवर में फैट ज्यादातर कार्बोहाइड्रेट्स से बनता है। खासतौर से रिफाइंड कार्ब्स से। सोचिए आपका रूटीन क्या है? सुबह चाय और बिस्किट, दोपहर में रोटी या चावल, शाम को फिर से चाय या कुछ नमकीन वगैरह और रात को फिर से रोटी या राइस। यानी दिन में चार बार इंसुलिन
स्पाइक होना तो तय है। जब इंसुलिन बार-बार घटता करता है तो बॉडी फैट को ठीक से बर्न नहीं कर पाती। लीवर उसे फैट में कन्वर्ट करके स्टोर करने लगता है। इससे धीरे-धीरे लीवर के सेल्स के अंदर फैट जमा होने लगता है और इसी को फैटी लीवर कहा जाता है।

कैसे पहचानें फैटी लीवर?

फैटी लीवर एक साइलेंट कंडीशन होती है जिसमें ना कोई दर्द होता है और ना ही कोई प्रॉब्लम होती है और इसीलिए अक्सर फैटी लीवर का पता तब चलता है। जब या तो वो प्रॉब्लम बहुत ज्यादा बढ़ चुकी हो और या फिर आप किसी और प्रॉब्लम के लिए अपना अल्ट्रासाउंड कराने गए हो और उसमें डॉक्टर ने बोला हो कि आपको फैटी लीवरभी है। लेकिन अगर आप सिर्फ तीन साइंस को पहचान लें, तो आप जान सकते हैं कि आपके अंदर फैटी लीवर है या नहीं है।

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वीडियो क्रेडिट-Healthy Hamesha

पहला अगर आपका पेटटाइट  और हार्ड फील होता है। पेट दबाने से मुलायम चर्बी नहीं बल्कि अंदर एक टाइटनेस एक पत्थर जैसी फीलिंग महसूस होती है, तो इसका मतलब है कि आपके अंदर विसरल फैट बढ़ा
हुआ है जो कि बहुत ही ज्यादा नुकसान देने वाला है।दूसरा अगर आपकी ब्लड रिपोर्ट्स में आपका ट्राइग्लिसराइड्स बहुत ज्यादा बढ़ा हुआ है तो यह भी फैटी लीवर का एक स्ट्रांग इंडिकेटर है। यानी अगर ट्राइग्लिसराइड्स 150 के ऊपर है तो आपको अलर्ट होने की जरूरत है। और तीसरा अगर खाने खाने के बाद आपको  थकान महसूस होती है। ऐसा लगता है जैसे एनर्जी आना बिल्कुल बंद हो गया है और बहुत ज्यादा नींद सी आ रही है तो यह इंसुलिन स्पाइक और लिवर ओवरलोड का साइन हो सकता है।

फैटी लीवर और बैली फैट कैसे कम करें?

अगर इन तीन में से दो साइन भी आपके अंदर है तो आपको आज ही एक्शन लेना होगा। सबसे पहले इंसुलिन को रिसेट कीजिए। बार-बार  हाई कार्ब्स फूड लेने से परहेज कीजिए। इसकी जगह 24 घंटे में सिर्फ तीन प्रॉपर मील्स लीजिए। इससे आपकी इंसुलिन बैलेंस में आएगी। और जब इंसुलिन आपके नीचे आएगी तो बॉडी स्टर्ड फैट को अपने आप जलाना शुरू कर देगी। दूसरा अपनी डाइट से रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट्स को बिल्कुल बंद कर दीजिए। वाइट राइस, मैदा, ब्रेड, बिस्किट्स, बेकरी आइटम्स, चीनी, मिठाई, ज्यादा मीठा, फ्रूट, ज्यादा फ्रूट जूसेस, कोला या सोडा इस तरह की चीजें कम से कम चार हफ्ते के लिए बिल्कुल बंद कर दीजिए। मील्स में भी रोटी और चावल कम करके अपने खाने में सब्जी, फाइबर और प्रोटीन को ज्यादा लीजिए। तीसरा स्टेप है अपने डिनर को जल्दी करना।अगर आप जिम जा सकते हैं तो आपके लिए बहुत ही बढ़िया है। लेकिन अगर नहीं भी जा सकते हैं तो कम से कम आधा घंटा ब्रिस्क वॉक तो जरूर कीजिए। वॉक से इंसुलिन सेंसिटिविटी इंप्रूव होती है। ट्राइग्लिसराइड्स कम होते हैं और लीवर पर प्रेशर जो है वो भी कम पड़ता है।  ये बैली फैट और फैटी लीवर को कम करता है.

 

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