High Cholesterol: कोलेस्ट्रोल शरीर के लिए बहुत अच्छा होता है. लेकिन अगर ये बढ़ने लगे तो हार्ट से लेकर ब्लड प्रेशर तक जैसी गंभीर बीमारियां शरीर को घेरने लगती हैं. आपको बता दे,कोलेस्ट्रॉल लिवर बनाता है. ये चिपचिपा मोम की तरह दिखता है. इसका काम हार्मोन बनाना और भोजन पचाने का होता है. लेकिन अगर ये बढ़ता है तो खून गाढ़ा हो जाता है. ये चर्बी धमनियों को ब्लॉक कर देती है. जिसकी वजह से हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी बीमारियों को पैदा करता है. जब कोलेस्ट्रोल बढ़ता है तो शरीर को कुछ संकेत देता है. इसकी जानकारी देश के जाने-माने हार्ट स्पेशलिस्ट डॉ बिमल छाजेर दे रहे हैं.
कोलेस्ट्रोल कितना होना चाहिए?
डॉ बिमल छाजेर का कहना है कि, कोलेस्ट्रॉल 130 से 180 रेंज अच्छा माना जाता है.जो रिवर्सल करना चाहते हैं वो 130 के नीचे ही रखें। जैसे लोग बोलते हैं 130 से 180 है तो 180 ठीक है। मैं बोलता हूं अभी ठीक
नहीं है. वो 130 ही ठीक है। इनफैक्ट 130 से कम हार्ट की बीमारी से बचाता है.
देखें वीडियो
वीडियो क्रेडिट: SAAOL Heart Center
High Cholesterol को कैसे करें कंट्रोल?
अगर आपका कोलेस्ट्रॉल 200 से ऊपर है तो तुरंत दवाई लेनी चाहिए. सबसे फेमस दवाइयां रिडक्ट इनबिटर और एटबोस्टटिन रोसोस्टटिन हैं. दवाई की एक ही प्रॉब्लम है कि इसको हर रोज लेना पड़ेगा. जिस दिन नहीं लेंगे उस दिन फिर बढ़ जाएगी। इसीलिए रेड मीट, तला-भूना, मीठा, तेल और मसाले वाला खाना बिल्कुल बंद कर दें. रोजाना एक्सरसाइज करें और हरी सब्जियां और फल खाएं. फैट वाली चीजों के सेवन से बचें.
High Cholesterol होने पर शरीर में क्या लक्षण दिखते हैं?
अगर आपने खाना पीना में कंट्रोल कर दिया, नॉनवेज बंद कर दिया, दूध कट कर दिया और आपकी
कोलेस्ट्रॉल कम हो गई इसका मतलब आपका एक्सटर्नल वाला ज्यादा काम कर रहा है.अगर आपका इसके बावजूद भी कोलेस्ट्रॉल हाई है तो डॉक्टर से संपर्क करें.
- आँखों के आस-पास छोटे, उभरे हुए पीले रंग के धब्बे पड़ने लगते है. इसके साथ ही आँखों की पुतली के आस-पास का रंग भी बदलने लगता है.
- पैरों में दर्द और ऐंठन होना शुरु हो जाती है. जिसके कारण चलना-फिरना मुश्किल हो जाता है. कुछ लोगों के पैरों में सुन्नपन और ठंडापन भी महसूस होता है.
- पैरों के साथ हड्डियों के जोड़ों में सूजन आना शुरु हो जाता है. जिसके कारण तेज दर्द होता है.
- कोलोस्ट्रोल बहुत ज्यादा बढ़ने पर घाव बहुत देर से भरते हैं.
- शरीर बहुत थका हुआ महसूस करता है. थोड़ा सा चलने पर सांस फूलने लगती है. सांस लेने में दिक्कत होती है.
- कुछ लोगों को सीने में दर्द के साथ बेचैनी होना शुरु हो जाती है.
Disclaimer: यह लेख और इसमें दी गई चिकित्सीय परामर्श केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से किसी योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इस लेख में बताए गए तरीकों और दावों को केवल सुझाव माना जाना चाहिए; डीएनपी इंडिया हिंदी न तो इनकी पुष्टि करता है और न ही खंडन करता है। ऐसे किसी भी सुझाव/उपचार/दवा/आहार का पालन करने से पहले हमेशा डॉक्टर से सलाह लें।






