Kidney Health: क्रिएटिनिन का बढ़ा हुआ लेवल कब सबसे ज्यादा खतरनाक होता है? डॉक्टर से जानें

Kidney Health: क्रिएटिनिन लेवल बढ़ते ही किडनी फेल होने की तरफ बढ़ने लगती है। अगर इसे सही समय पर ना रिवर्स किया जाए या फिर दवा ना ली जाए तो जानलेवा साबित हो सकता है। इसके लेवल की जानकारी डॉक्टर के द्वारा दी जा रही है।

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Kidney Health:  किडनी शरीर का बेहद महत्वपूर्ण अंग है। इसका काम ब्लड को फिल्टर करना और गंदगी को बाहर पेशाब के जरिए फेंकना है। लेकिन शुगर, बल्ड प्रेशर या फिर खराब लाइफस्टाइल के चलते इसमें खराबी आ गई है तो ये दिल से लेकर दिमाग तक को प्रभावित करती है। क्योंकि किडनी में परेशानी आने पर शरीर की गंदगी बाहर नहीं निकल पाती है। जिसके कारण क्रिएटिनिन लेवल बढ़ना शुरु हो जाता है। क्रिएटिनिन के कई सारे लेवल हैं, जो गुर्दे के मरीजों में लंबे समय बाद दिखते हैं।क्रिएटिनिन का लेवल अत्यधिक बढ़ने से दिल का दौरा, फेफड़ों में पानी , दिमागी कोमा और मल्टी-ऑर्गन फेलियर जैसी चीजें मौत का कारण बनती हैं। इसीलिए इसका सही लेवल पता होते ही इलाज करना बेहद जरुरी होती है। इसकी जानकारी डॉक्टर पुरु धवन के द्वारा दी जा रही है।

Kidney Health:  क्रिएटिनिन का लेवल बढ़ा हुआ कब हो जाता है खतरनाक?

डॉक्टर का कहना है कि,जब क्रिएटिनिन का स्तर 3 या 4 पर पहुंचता है तो तब जाकर शरीर में थकावट जैसे लक्षण दिखते हैं। लेकिन जब ये लेवल 5 से 7 पर पहुंच जाती है तो इस स्थिति में किडनी फेल हो सकती है। तभी डॉक्टर के द्वारा डायलिसिस की सलाह दी जाती है।

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वीडियो क्रेडिट-DrPuruDhawan

आदमी और औरतों के लिए क्रिएटिनिन का लेवल अलग-अलग है। आदमियों के लिए 1.2 और महिलाओं के लिए 1.0 है। किडनी डैमेज होने को दो प्रमुख कारण शुगर या फिर हाई ब्लड प्रेशर होता है। इसीलिए सही डाइट और किडनी फंक्शन से इसे कुछ हद कर रिवर्स किया जा सकता है।क्रिएटिनिन के लेवल को कम करने का सही तरीका हाई बीपी और शुगर को कंट्रोल करना है।इसके साथ ही डाइट में प्रोटीन का सेवन ना के बराबर करना है। इसीलिए हेल्दी और कम प्रोटीन वाले भोजन का ही सेवन करें। कम खाएं और पोटेशियम वाली चीजों को ना खाएं। शरीर में सूजन है तो डॉक्टर की सलाह पर पानी का सेवन करें।

क्रिएटिनिन  लेवल बढ़ने  पर शरीर में क्या दिखते हैं लक्षण? 

  1. पैरों को टकनों और तलवों में सूजन बहुत अधिक हो जाता है।
  2. पेशाब कम और बहुत ही झाग के साथ आता है। इसके साथ पेशाब का रंग बदल जाता है।
  3. मरीज के पेशाब में खून भी आना शुरु हो जाता है।
  4. शरीर में अधिक थकावट और कमजोरी हो जाती है।
  5. जी मिचलाना , भूख कम लगना।
  6. स्किन पर एलर्जी के साथ सांस फूलना आदि लक्षण दिखते हैं।

 

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