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कांवड़ मेले से पहले Uttarakhand के मंंदिरों में Dress Code हुआ लागू, जानें से पहले जरुर पढ़ लें

Uttarakhand: उत्तराखंड में कुछ दिनों पहले पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के सचिव महंत रविंद्र पुरी की ओर से ऋषिकेश के नीलकंठ महादेव मंदिर और हरिद्वार के दक्षेश्वर महादेव मंदिर में अमर्यादित कपड़े पहनकर आने वाले श्रद्धालुओं पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी। अब सावन के कांवड़ मेला शुरू होने से पहले पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी ने ...

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By: Hemant Vatsalya

Published: जून 9, 2023 12:49 अपराह्न

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Uttarakhand: उत्तराखंड में कुछ दिनों पहले पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के सचिव महंत रविंद्र पुरी की ओर से ऋषिकेश के नीलकंठ महादेव मंदिर और हरिद्वार के दक्षेश्वर महादेव मंदिर में अमर्यादित कपड़े पहनकर आने वाले श्रद्धालुओं पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी। अब सावन के कांवड़ मेला शुरू होने से पहले पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी ने ड्रेस कोड को लागू कर दिया है। इस ड्रेसकोड को लागू करने के क्रम में इन दोनों मंदिरों में स्थाई तौर पर आदेशात्मक बैनर लगा दिए हैं। अब से महिला हो या पुरुष कोई भी इन मंदिरों में गैर मर्यादित कपड़े पहनकर दर्शन नहीं कर सकेगा।

जानें क्या है इन पोस्टरों में लोगों से अपील

बता दें इस महीने के बाद सावन में प्रसिद्ध कांवड़ यात्रा शुरू हो जाएंगी, साथ ही साथ सावन के सोमवार में भक्तों की संख्या में भारी इजाफा हो जाता है। इस दौरान उत्तराखंड के इन स्थानों पर भव्य कांवड़ मेला लगता है। इसी सब को देखते हुए महानिर्वाणी अखाड़ा के इन मंदिरों पर आदेश के पोस्टर स्थाई रूप से लगा दिए गए हैं। जिसमें अपील की गई है कि महिलाएं या लड़कियां शॉर्ट कपड़े पहनकर मंदिर में प्रवेश न करें। इसके अलावा पोस्टर के माध्यम से यह भी अपील की गई है कि कटी-फटी जींस,मिनी स्कर्ट, हाफ पेंट, बरमूडा, नाइट सूट तथा अन्य छोटे कपड़े पहनकर मंदिर आने वाले मंदिर के बाहर से ही दर्शन करें।

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साधु-संतों ने किया स्वागत

महानिर्वाणी अखाड़ा के ड्रेस कोड लागू करने की इस पहल का देवभूमि के साधुसंतों ने दिल खोलकर स्वागत किया है। स्वामी आनंद स्वरूप ने कहा कि सभी मंदिरों में ड्रेस कोड लागू होना ही चाहिए। ये श्रद्धा के स्थान हैं मंदिरों में पिकनिक मनाने थोड़े ही नहीं जाया जाता। हमें इस बारे में दक्षिण भारत के लोगों और उनकी परंपराओं से फिर से सीख लेने की जरूरत है कि वहां के मंदिरों में लोग कितनी शालीनता के साथ पूजा अर्चना करने जाते हैं। लोग इतने अमर्यादित हो गए हैं कि धार्मिक चिंतन के स्थलों पर आकर उल्टी सीधी रील्स बनाकर सनातन धर्म के इन पवित्र स्थानों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। जो लोग इन आदेशों का विरोध कर रहे हैं उन्हें भी समझना चाहिए। यदि फिर भी इस व्यवस्था का विरोध करेंगे तो उनके ऊपर भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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Hemant Vatsalya

Hemant Vatsalya Sharma DNP INDIA HINDI में Senior Content Writer के रूप में December 2022 से सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने Guru Jambeshwar University of Science and Technology HIsar (Haryana) से M.A. Mass Communication की डिग्री प्राप्त की है। इसके साथ ही उन्होंने Delhi University के SGTB Khalasa College से Web Journalism का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है। पिछले 13 वर्षों से मीडिया के क्षेत्र से जुड़े हैं।
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