Iran-US War: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। 28 फरवरी को अमेरिकी हमलों और ईरान के पलटवार से शुरू हुआ यह विवाद जहां मध्यस्थता से हुए 60 दिनों के सीज़फायर के बाद थमता हुआ नज़र आ रहा था। जून में दोनों देशों के बीच एक शांति समझौता भी तय हो गया था। होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हुए हमलों ने इस समझौते को तोड़ दिया और दोनों देश फिर से आमने-सामने आ गए हैं। ईरान का दावा है कि गुरुवार शाम को उनके दो अलग-अलग शहरों में ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमले किए गए। इसके साथ ही अब एक बार फिर युद्ध की स्थिति देखी जा रही है। आइए जानते हैं पूरी खबर डिटेल्स में क्या है।
क्यों शुरू हुआ शांति समझौते के बीच Iran-US War शुरू
रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि अमेरिकी सेना ने ईरान के 80 से ज़्यादा सैन्य ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की है। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई होर्मुज में जहाजों पर हुए हमलों का बदला लेने के लिए की गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने नाटो समिट में साफ़ कर दिया है कि ईरान के साथ हुआ सीज़फायर समझौता अब ख़त्म हो चुका है और वे अब ईरान के साथ कोई डील नहीं करना चाहते। वहीं ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया है कि उन्होंने बहरीन और कुवैत में बने 85 अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए हैं। इसमें अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट का हेडक्वार्टर और अली अल-सलेम एयर बेस भी शामिल हैं।
ईरान ने अमेरिका को दिया ये संदेश
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची का कहना है कि धमकियों के बीच अमेरिका से कोई बातचीत नहीं होगी। अगर बात करनी है तो अमेरिका को पहले पुराने समझौतों की इज़्ज़त करनी होगी। इस बढ़ते तनाव के बीच कुवैत से 20 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर आ रहा भारतीय झंडे वाला टैंकर होर्मुज स्ट्रेट के पास ओमान के तट से वापस लौट गया है।
ईरान को लेकर क्या बोले डोनाल्ड ट्रंप
यह तनाव तब और बढ़ गया जब अमेरिका ने ईरान पर लगातार दूसरे दिन भी हवाई हमले किए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि उन्होंने ईरान को बहुत करारा जवाब दिया है और वे आगे भी बड़े हमले (जैसे पावर ग्रिड और पानी के प्लांट ठप करना) करने से पीछे नहीं हटेंगे। ऐसे में महायुद्ध की स्थिति आ गई है जिस पर दुनिया भर की नजर टिकी है।
जानें अमेरिका ईरान युद्ध को लेकर अब तक क्या हुआ
बता दे कि 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हवाई हमले किए जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई के मारे जाने की खबर आई। इसके जवाब में ईरान ने अमेरिकी ठिकानों और इजराइल पर ताबड़तोड़ मिसाइलें और ड्रोन दागे। बढ़ते तनाव को देख यूएन, चीन और रूस समेत कई देशों ने शांति की अपील की जिसके बाद पाकिस्तान की मध्यस्थता से अप्रैल में दोनों देश 60 दिनों के सीज़फायर पर राजी हुए। अप्रैल से जून के बीच परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंध हटाने को लेकर बातचीत हुई और 17 जून को एक शांति समझौता भी तय हो गया। अब होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हुए हमलों के बाद यह समझौता टूट गया। अमेरिका का कहना है कि अब कोई भी समझौता नहीं होगा।
