क्या इमोशनल ट्रॉमा का है Cancer से कनेक्शन! एक्सपर्ट की बातें सुन लग सकता है झटका

Cancer: अगर आप लंबे समय तक स्ट्रेस में हैं या आप इमोशनली सदमे में में है तो आपके लिए खतरा ज्यादा है क्योंकि आप बीमारी को दावत दे सकते हैं। आइए जानते हैं कैसे इमोशनल ट्रॉमे की वजह से परेशान हो सकते हैं।

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Photo Credit- Google Cancer

Cancer: न सिर्फ खानपान और लाइफस्टाइल बल्कि अगर आप इमोशनली भी सदमे में हैं तो या आपके लिए कैंसर की वजह बन सकती है। यह सुनकर शायद आपको हैरानी हो लेकिन डॉक्टर तरंग कृष्ण ने इस बारे में जो कहा हुआ निश्चित तौर पर हर किसी के लिए अलर्ट है। अगर आप लंबे समय तक किसी भी दर्द को दबाकर रखे हैं तो कैंसर का रिस्क काफी हद तक बढ़ जाता है। आइए जानते हैं आखिर कैसे इमोशनल ट्रॉमा कैंसर में आपके लिए जवाबदेह बन सकता है और इस दौरान स्ट्रेस आपके लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

क्या है सबसे ज्यादा खतरनाक इमोशनल ट्रॉमा

डॉ तरंग कृष्ण इस बारे में बात करते हुए बताते हैं कि मेंटल ट्रॉमा अक्सर कैंसर की वजह बन जाती है। अगर आप किसी अपने के खोने के बाद शोक की स्थिति में होते हैं तो इस दौरान रिस्क काफी बढ़ जाता है जहां आप एक अलग दुनिया में होते हैं। एक्सपर्ट ने बताया कि सबसे ज्यादा इमोशनल सदमा शोक का होता है जैसे एक लड़के का जो अपनी मां से बहुत ज्यादा जुड़ा होता है। उसकी मां या पिता की डेथ हो गई। अब वह सदमे में चला जाता है तो वह सदमा सदमा नहीं है जहां वह एक ऐसे शोक में है कि उसके एक अपने अब इस दुनिया में नहीं हैं।

कैसे इमोशनल ट्रॉमा Cancer के लिए है घातक

इसका साफ मतलब बताते हुए डॉक्टर कृष्ण की बातों पर गौर करें तो उन्होंने कहा अगर आप स्ट्रेस या ट्रॉमा में होते हैं तो यह अप्रत्यक्ष रूप से कैंसर के लिए रिस्क बढ़ा सकता है। लंबे समय तक सिंपैथेटिक नर्वस सिस्टम को लगातार यह ट्रॉमा सक्रिय रखते हैं जिसकी वजह से कॉर्टिसोल और एड्रेनालाईन जैसे स्ट्रेस हार्मोस का रिस्क बढ़ने लगता है और उसकी वजह से इम्यून सिस्टम कमजोर होते हैं। यह नेचुरल कलर बनकर कोशिकाओं को दबा देता है जो ट्यूमर को दबाने के लिए जरूरी होती है। लंबे समय तक तनाव की वजह से सूजन पैदा होता है और कैंसर की वजह बनती है।

Disclaimer: यह लेख और इसमें दी गई चिकित्सीय परामर्श केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से किसी योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इस लेख में बताए गए तरीकों और दावों को केवल सुझाव माना जाना चाहिए; डीएनपी इंडिया हिंदी न तो इनकी पुष्टि करता है और न ही खंडन करता है। ऐसे किसी भी सुझाव/उपचार/दवा/आहार का पालन करने से पहले हमेशा डॉक्टर से सलाह लें।

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