H1N1: क्या फ्लू वैक्सीन रोक सकता है वायरस, एम्स के पूर्व डायरेक्टर डॉ गुलेरिया ने किया बड़ा खुलासा

H1N1: स्वाइन फ्लू एक संक्रामक सांस संबंधी बीमारी है, जो टाइप A इन्फ्लूएंजा वायरस के कारण होती है। यह हवा के ज़रिए एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में तेजी से फैलता है। क्या वैक्सीन से इसे कंट्रोल किया जा सकता है। आइए जानते हैं डिटेल्स।

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Photo Credit- Google H1N1

H1N1: दिल्ली जैसे शहर में फिलहाल कोरोनावायरस की तरह एक इन्फेक्शन का कहर देखा जा रहा है। जी हां, हम बात कर रहे हैं स्वाइन फ्लू यानी H1N1 इन्फ्लूएंजा की जिसकी वजह से अफरातफरी मची हुई है लेकिन क्या इसे पूरी तरह से कंट्रोल किया जा सकता है। क्या सालाना फ्लू का टीका लगवाने से H1N1 से सुरक्षा मिल सकती है। इस बारे में बात करते हुए एम्स के पूर्व डायरेक्टर डॉ रणदीप गुलेरिया ने कुछ ऐसा कहा जो आपको हैरान कर सकता है। दरअसल डॉक्टर के मुताबिक सालाना फ्लू वैक्सीन स्वाइन फ्लू से सुरक्षा देता है लेकिन किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

क्या है स्वाइन फ्लू और वैक्सीन की सच्चाई

डॉ रणदीप गुलेरिया का कहना है कि फ्लू वैक्सीन H1N1 से सुरक्षा देता है लेकिन इस दौरान आपको यह ध्यान रखना होगा कि यह गंभीर संक्रमण अस्पताल में भर्ती होने और आईसीयू में जाने के जोखिम को कम करती है। इसके साथ ही आपको यह ध्यान रखना चाहिए कि आप मानसून के महीने से वैक्सीन लगवा ले ताकि इससे सुरक्षा मिले।

H1N1 से बचाव के लिए क्या है वैक्सीन लेने का समय

इसके साथ ही एक्सपर्ट के मुताबिक कहा गया कि हर साल जो फ्लू का टीका बनता है उसमें H1N1 वायरस से लड़ने की दवाई पहले से मौजूद होती है जो बीमारी को बढ़ने नहीं देता है। डॉक्टर की माने तो अगर टीका लगने के बाद भी आपको फ्लू हो गया है तो यह उसे ज्यादा बढ़ने नहीं देता है और आप जल्दी ठीक हो सकते हैं। इसके साथ ही डॉक्टर गुलेरिया ने यह भी कहा कि अगर आप अप्रैल या मई के महीने में टीके नहीं लगा पाए हैं तो आप इसे अभी लगवा सकते हैं। यह मानसून के मौसम में होने वाली बीमारियों से आपको बचा कर रखता है और इसे हर साल लगवाना जरूरी है क्योंकि धीरे-धीरे इसका असर कम होने लगता है।

दिल्ली में H1N1 का कहर बरकरार

अगर रिपोर्ट की बात करें तो दिल्ली में H1N1 का कहर बरकरार है और रिपोर्ट्स की माने तो अब तक 2308 मामले सामने आ चुके हैं। सरकारी एक्शन लिए जा रहे हैं। अगर स्वाइन फ्लू के लक्षण की बात करें तो तेज बुखार, गले में खराश के साथ-साथ डायरिया, उल्टी, थकान जैसी परेशानी होती है और यह सांस लेने और छींकने से फैल रहा है।

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