Ajit Pawar की सियासी विरासत को रफ्तार देंगी पत्नी सुनेत्रा? प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल संग मुलाकात से हलचल! सामने कई चुनौतियां

Ajit Pawar के पंचतत्व में विलीन होने के बाद एनसीपी में नेतृत्व को लेकर नए सिरे से चर्चाओं का दौर शुरू है। कयास लगाए जा रहे हैं कि अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार अपने पति की सियासी विरासत को रफ्तार दे सकती हैं।

Ajit Pawar: महाराष्ट्र के एक चमकते सियासी सूरज अजित पवार का अस्त सदैव के लिए हो गया। एनसीपी अब नए राजनीतिक सफर की ओर बढ़ेगी। अब तक पार्टी की कमान संभाल रहे अजित पवार पंचतत्व में विलीन हो गए हैं जिसके बाद एनसीपी में नेतृत्व को लेकर चर्चा छिड़ गई है। क्या अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार आगे चलकर सूबे की डिप्टी सीएम बनेंगी? अजित पवार के बेटे पार्थ पवार क्या राजनीति में सक्रिय होंगे?

छगन भुजबल या प्रफुल्ल पटेल जैसे नेता क्या आगे आकर पार्टी की कमान संभाल सकते हैं? ऐसे तमाम सवाल हैं जो उठ रहे हैं। इसी बीच अपुष्ट खबर है कि छगन भुजबल और प्रफुल्ल पटेल ने सुनेत्रा पवार से मुलाकात की है। वे उन्हें महाराष्ट्र के नए डिप्टी सीएम के रूप में प्रस्तावित करने के पक्ष में है। यदि ऐसा होता है तो सुनेत्रा पवार ही अपने पति अजित पवार की सियासी विरासत को रफ्तार देती नजर आएंगी। हालांकि, उनके समक्ष कई चुनौतियां हैं जिनसे पार पाना आसान नहीं होगा।

क्या Ajit Pawar की सियासी विरासत को रफ्तार देंगी पत्नी सुनेत्रा?

इस सवाल का पुख्ता जवाब अभी सामने नहीं आया है। अपुष्ट खबरों के मुताबिक छगन भुजबल, प्रफुल्ल पटेल समेत कुछ अन्य दिग्गज एनसीपी नेताओं ने अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार से मुलाकात की है। उनका नाम बतौर डिप्टी सीएम प्रस्तावित किया जा सकता है। सुनेत्रा पवार फिलहाल राज्यसभा सांसद हैं।

यदि ऐसा हुआ तो वे अजित पवार की सीट बारामती से चुनाव लड़ सकती हैं। हालांकि, इसको लेकर अभी कोई पुष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। यदि सुनेत्रा पवार का नाम महाराष्ट्र के नए डिप्टी सीएम के लिए प्रस्तावित किया जाता है, तो ये तय होगा कि अजित पवार की सियासी विरासत को वही रफ्तार देंगी।

सुनेत्रा पवार के समक्ष कई चुनौतियां!

अजित पवार के पंचतत्व में विलीन हो जाने के बाद उनके सबसे करीब रहीं सुनेत्रा पवार के समक्ष अब चुनौतियां बढ़ गई हैं। पहले पार्टी पर अजित पवार का पूरा नियंत्रण था। नीतियों से लेकर संगठन और टिकट वितरण तक में वो बिना किसी रोक-टोक के फैसले लेते थे। एनसीपी की दिशा क्या होगी ये अजित पवार सख्ती के साथ तय करते थे।

हालांकि, अब स्थिति बदल सकती है। एनसीपी प्रमुख के निधन के बाद कार्यकर्ताओं के बीच नेतृत्व को लेकर असंतोष देखने को मिल सकता है। इतना ही नहीं, कई नेता अवसर की तलाश में हाईकमान की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि सुनेत्रा पवार व एनसीपी के अन्य शीर्ष नेता कैसे इस चुनौती से पार पाते हुए अजित पवार की सियासी विरासत को रफ्तार देते हैं।

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