Bengal Assembly Election 2026: मतदान की तिथि नजदीक आने के साथ बंगाल का सियासी समीकरण बदलता नजर आ रहा है। चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया के बाद अंतिम सूची जारी कर दी है। इसके तहत बंगाल में 90 लाख से अधिक नाम मतदाता सूची से कटे हैं। बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए दो चरणों में मतदान होना है।
उससे पूर्व जारी मतदाता सूची सीएम ममता बनर्जी के लिए झटका मानी जा रही है। आंकड़े इस दावे को और बल दे रहे हैं। नई सूची के बाद औसतन राज्य की सभी 294 विधानसभा सीटों पर 30-31 हजार मतदाताओं की संख्या कम हुई है। कटे नाम मतदाता सूची का कुल 11.85 फीसद हैं। ऐसे में बड़ा सवाल है कि क्या पश्चिम बंगाल में खेला होने वाला है? आइए इस सवाल का जवाब ढूंढ़ने की कोशिश करते हैं।
बंगाल में मतदाता सूची से कटे 90.30 लाख वोटर्स के नाम
चुनाव आयोग ने एसआईआर की प्रक्रिया को पूरा करते हुए अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी है। इसके तहत बंगाल में करीब 90.30 लाख पुराने मतदाताओं के नाम कटे हैं। ये नाम फर्जी, मृतक, विस्थापित, अनुपस्थित वाली श्रेणी में आते हैं। बड़ी संख्या में मतदाताओं का नाम कटने के बाद राज्य की सभी विधानसभा सीटों पर इसका असर पड़ता नजर आ रहा है।
आयोग की ओर से 90.30 लाख मतदाताओं का नाम सूची से हटाना कुल नामों के करीब 11.85 फीसदी है। औसतन हर सीट पर 30-31 हजार मतदाताओं के नाम कम हुए हैं। पिछले विधानसभा चुनाव की बात करें तो बंगाल की 101 सीटें ऐसी थीं जहां 1 से 15000 वोटों के अंतर से हार-जीत हुई थी। टीएमसी को बंगाल चुनाव 2021 में करीब 2.90 करोड़, तो वहीं बीजेपी को 2.29 करोड़ वोट मिला था।
प्रतिशत में ये आंकड़ा क्रमश: 48.46 और 37.98 फीसदी होता है। ऐसे में अब करीब 12 फीसदी मतदाताओं का नाम सूची से हट जाना कई संभावनाओं की ओर इशारा करता है। मतदाता सूची से हटे नामों में बहुसंख्यक मुस्लिम वोटर्स के नाम हैं जो ममता बनर्जी का कोर वोटबैंक है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में मतदाताओं का नाम कटना ममता बनर्जी के लिए झटका माना जा रहा है।
क्या Bengal Assembly Election 2026 में होगा खेला?
यहां खेला होने का आशय टीएमसी की हार और बीजेपी की जीत से है। इस सवाल का पुख्ता जवाब 4 मई को बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों की घोषणा के साथ स्पष्ट होगा। बीजेपी पूरी जोर-शोर के साथ बंगाल चुनाव लड़ रही है। पीएम मोदी, अमित शाह, राजनाथ सिंह, योगी आदित्यनाथ, नितिन नवीन समेत तमाम दिग्गज नेता बंगाल के सियासी रण में डेरा डाले हुए हैं।
दूसरी ओर ममता बनर्जी सियासी रण मे हैं। टीएमसी चुनाव आयोग के खिलाफ मुखर है। ममता बनर्जी की रैलियों में लोगों का उत्साह तो नजर आ रहा है, लेकिन बीजेपी की तुलना में टीएमसी की रणनीतियां कमजोर साबित हो रही हैं। हालांकि, क्या खेला होगा, बीजेपी सत्ता में आएगी और टीएमसी का चौका लगेगा? इन सभी सवालों के जवाब 4 मई को नतीजों की घोषणा के साथ स्पष्ट हो जाएंगे।






