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Bhupen Borah: ‘असम कांग्रेस में एक ही हिंदू नेता..,’ चुनाव से पहले पूर्व अध्यक्ष के इस्तीफे पर CM हिमंत का तंज, क्या बढ़ेंगी मुश्किलें?

Bhupen Borah

Picture Credit: गूगल (भूपेन बोरा & सीएम हिमंत बिस्व सरमा - सांकेतिक तस्वीर)

Bhupen Borah: असम में सियासी उठा-पटक जोरों पर है। चुनावी साल में सूबे की सत्तारुढ़ बीजेपी के साथ कांग्रेस भी कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है। हालांकि, कांग्रेस को चुनाव से पहले बड़ा झटका लग गया है। गौरव गोगोई के नेतृत्व में असम के चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही कांग्रेस से कद्दावर नेता भोपेन बोरा ने इस्तीफा दे दिया है। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन बोरा के इस्तीफे के बाद सूबे में सियासी संग्राम छिड़ा है।

एक ओर जहां कांग्रेस ने प्रियंका गांधी को प्रभारी बनाकर असम में मजबूती दिखाने की कोशिश की। वहीं भूपेन बोरा के इस्तीफे ने पार्टी में अंदरखाने हलचल मचा दी है। स्थानीय सीएम हिमंत बिस्व सरमा ने भी भूपेन बोरा के इस्तीफे पर तंज कसा है। क्या उनके इस्तीफे का असर चुनाव पर भी पड़ सकता है? ये सवाल तेजी से उठ रहे हैं। आइए हालिया घटनाक्रम पर चर्चा करते हुए इस सवाल का जवाब देने की कोशिश करते हैं।

चुनाव से पहले पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष Bhupen Borah के इस्तीफे पर CM हिमंत का तंज

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन बोरा के इस्तीफे पर जोरदार तंज कसा है।

सीएम हिमंत बिस्व सरमा ने कहा है कि “असम कांग्रेस में एक ही हिंदू नेता था जो किसी राजनीतिक वंश का नहीं था। आज उस नेता ने भी कांग्रेस से पदत्याग कर दिया है। आज की कांग्रेस हिंदुओं के हित में नहीं है।” यहां बात भूपेन बोरा के संदर्भ में हो रही है। दरअसल, भूपेन बोरा ने चुनावी वर्ष में आज ही गौरव गोगोई को पत्र लिखकर इस्तीफे की पेशकश की है।

तीन दशकों से ज्यादा तक कांग्रेस को समय देने वाले भूपेन बोरा ने अपने फैसले को समय की मांग बताया है। भूपेन बोरा के इस्तीफे के बाद सीएम हिमंत बिस्व सरमा ने कांग्रेस को जमकर निशाने पर लिया है। उन्होंने पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि अभी कई नेता कांग्रेस को छोड़ेंगे। उनका कहना है कि कुछ ही दिनों बाद पार्टी की कमान रकीबुल हसन को सौंप दी जाएगी।

क्या चुनाव से पहले हुए इस्तीफे से बढ़ेंगी कांग्रेस की मुश्किलें?

चुनावी समर के दौरान एक-एक कार्यकर्ता अहम होता है। सभी दलों के कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर मेहनत कर मतदाताओं को लामबंद करने का काम करते हैं। ऐसे में किसी नेता या कार्यकर्ता का पार्टी छोड़ना तो निश्चित रूप से नुकसानदायक है। उसमें भी यदि नेता भूपेन बोरा जैसा हो जिसने कांग्रेस को तीन दशक से ज्यादा का समय दिया हो, उनका पार्टी से जाना ध्यान आकर्षित करता है।

भूपेन बोरा के कांग्रेस छोड़ने का कितना असर चुनाव पर पड़ेगा, ये परिणाम आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। हा, ये जरूर है कि भूपेन बोरा संग हजारों की संख्या में समर्थक भी पार्टी के खिलाफ झंडा उठा सकते हैं जो जमीनी स्तर पर चुनावी समीकरण को प्रभावित कर सकते हैं। फिलहाल सबकी नजरें चुनाव पर टिकीं हैं जिसके परिणाम आने के बाद सभी सवालों का स्पष्ट जवाब मिल जाएगा।

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