सदन में Women’s Reservation Bill का गिरना क्या बंगाल चुनाव को करेगा प्रभावित? तमिलनाडु में विरोध के बीच कैसे बदला समीकरण? समझें

Women's Reservation Bill का सदन में गिरना क्या बंगाल विधानसभा चुनाव में असर डालेगा? क्या परिसीमन को लेकर छिड़ी लड़ाई तमिलनाडु के सियासी समीकरण को बदल रही है? ऐसे तमाम सवाल तेजी से उठ रहे हैं।

Women's Reservation Bill

Picture Credit: गूगल (सांकेतिक तस्वीर)

Womens Reservation Bill: केन्द्र की सत्तारुढ़ दल आज विपक्ष पर मुखरता से हमलावर है। बीजेपी देशव्यापी प्रदर्शन कर विपक्षी दलों को महिला विरोधी करार दे रही है। पूरा मामला महिला आरक्षण बिल और परिसीमन से जुड़ा है। दरअसल, बीते कल लोकसभा में महिला आरक्षण और डीलिमिटेशन से जुड़ा बिलों का गिरना केन्द्र के लिए झटका माना जा रहा है।

इस बीच बीजेपी विपक्ष को कटघरे में खड़ा कर उन्हें महिला विरोधी करार देने में जुटी है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या महिला आरक्षण बिल को लेकर छिड़ा संग्राम बंगाल विधानसभा चुनाव को प्रभावित करेगा? तमिलनाडु में इसके विरोध के बीच समीकरण कैसे बदल गया है? आइए इन सवालों का जवाब ढूंढ़ने की कोशिश करते हुए हालिया घटनाक्रम पर चर्चा करते हैं।

सदन में Women’s Reservation Bill का गिरना क्या बंगाल चुनाव को करेगा प्रभावित?

इस सवाल का पुख्ता जवाब भविष्य के गर्भ में है जो नतीजों की ऐलान के साथ 4 मई को स्पष्ट होगा। हां, ये जरूर है कि बंगाल की मुख्य विपक्षी पार्टी बीजेपी इसे मुद्दा बनाएगी। बीजेपी टीएमसी को महिला आरक्षण बिल का विरोध करने वाली पार्टी करार दे चुकी है। आने वाले दिनों में खुले मंच से इसका जिक्र सुनने को मिल सकता है। पीएम मोदी, अमित शाह, सुवेंदु अधिकारी समेत तमाम नेता इसका जिक्र करते हुए निशाना साध सकते हैं।

टीएमसी हालांकि फ्रंटफुट से मोर्चा संभालते हुए बीजेपी पर हमलावर है। सांसद कल्याण बनर्जी ने महिलाओं के लिए 50 फीसदी सीट आरक्षित करने के प्रस्ताव का समर्थन करते हुए इसे अभी 543 लोकसभा सीटों पर लागू करने की चुनौती दी है। टीएमसी महिला आरक्षण को परिसीमन के साथ जोड़ने का विरोध कर रही है। बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए जारी प्रचार-प्रसार के बीच ये मुद्दा तेजी से गहराता नजर आ रहा है।

तमिलनाडु में विरोध के बीच कैसे बदला समीकरण?

मतदान से कुछ ही दिन पहले तमिलनाडु का सियासी समीकरण पूरी तरह से बदल गया है। कुछ दिन पहले तक तमिलनाडु में भ्रष्टाचार, महंगाई, रोजगार समेत अन्य बुनियादी मुद्दों पर चुनावी लड़ाई जारी थी। अब पूरा ध्यान परिसीमन पर केन्द्रित हो गया है। महिला आरक्षण के साथ परिसीमन का प्रावधान लिए जिस संविधान संशोधन विधेयक को सरकार ला रही थी उसकी कॉपी तक सीएम एमके स्टालिन जला चुके हैं।

चुनावी राज्य तमिलनाडु के विभिन्न हिस्सों में बीते दिनों प्रस्तावित परिसीमन को काले झंडे दिखाए गए। डीएमके इस मुद्दे को द्रविण राजनीति से जोड़ते हुए स्थानीय अखंडता पर वार बता रही है। इसको लेकर सूबे का सियासी पारा चढ़ता नजर आ रहा है। संसद में महिला आरक्षण कानून और डीलिमिटेशन से जुड़ा 131वां संवैधानिक संशोधन विधेयक गिरने के बाद तमिलनाडु का सियासी समीकरण पूरी तरह से बदल चुका है।

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