पार्टी विरोधी रुख के बाद BJP के खिलाफ Priyanka Chaturvedi ने खोला मोर्चा! जानें कैसे महिला आरक्षण विधेयक को दिखावा बता भड़क उठीं?

पूर्व राज्यसभा सांसद Priyanka Chaturvedi ने मुखरता से अपना पक्ष रखते हुए महिला आरक्षण विधेयक का जिक्र कर केन्द्र को निशाने पर लिया है।

Priyanka Chaturvedi

Picture Credit: गूगल (सांकेतिक तस्वीर)

Priyanka Chaturvedi: राजधानी दिल्ली से लेकर मुंबई, चेन्नई, कोलकाता समेत सभी बड़े-छोटे शहरों में महिला आरक्षण सुर्खियों में है। सदन में बीते कल महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़ा विधेयक गिरने के बाद प्रियंका चतुर्वेदी ने मोर्चा खोल दिया है।

पहले शिवसेना यूबीटी नेत्री ने इसे देश की महिलाओं के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताया। हालांकि, तमाम सवाल उठने के बाद प्रियंका चतुर्वेदी बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोलती नजर आईं। पूर्व राज्यसभा सांसद ने सवालिया अंदाज में बीजेपी को दिखावा न करने की नसीहत देते हुए गंभीर सवाल दागे हैं जिसकी चर्चा हो रही है।

महिला आरक्षण विधेयक पर बीजेपी से Priyanka Chaturvedi के सवाल!

सरकार विपक्ष को महिला विरोधी करार देते हुए आधी आबादी का हक खत्म करने की साजिश का जिक्र कर निशाना साध रही है। इसी बीच पूर्व सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने बीजेपी से गंभीर सवाल दागे हैं।

प्रियंका चतुर्वेदी लिखती हैं कि “चूंकि आप नारी शक्ति और 2029 में इसके कार्यान्वयन का समर्थन करने का दावा करते हैं, तो क्या आप अगले चुनाव चक्र में एक राजनीतिक दल के रूप में स्वेच्छा से 543 सीटों में से 180 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करेंगे? क्या आप अपने गठबंधन सहयोगियों से भी ऐसा करने का आग्रह करेंगे?

दूसरा विकल्प देते हुए प्रियंका चतुर्वेदी पूछती हैं कि “क्या आप 106वें संविधान संशोधन पर वापस जाएंगे और मानसून सत्र में एक नए संशोधन के माध्यम से जनगणना/परिसीमन के अनिवार्य प्रावधान को समाप्त करके इसे अगले चुनाव चक्र से लागू करेंगे? यदि उपरोक्त सभी प्रश्नों का उत्तर ‘नहीं’ है, तो दिखावा करना छोड़ देना ही बेहतर होगा।”

शिवसेना यूबीटी से राज्यसभा की सदस्य रहीं प्रियंका चतुर्वेदी की इस मुखर शैली को लेकर खूब सुर्खियां बन रही हैं।

देश की महिलाओं से पूर्व सांसद प्रियंका बड़ी अपील!

आधी आबादी की आरक्षण से जुड़ा विधेयक सदन में गिरने के बाद प्रियंका चतुर्वेदी ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया था।

सनद रहे कि पूर्व सांसद की पार्टी शिवसेना यूबीटी भी बिल के खिलाफ थी। ऐसे में उनका बयान पहले पार्टी विरोधी माना गया। हालांकि, फिर वे मुखरता के साथ केन्द्र को निशाने पर लेती नजर आईं।

उद्धव ठाकरे की दल से जुड़ीं पूर्व सांसद ने फिर महिलाओं से अपील कर कहा कि “देश की महिलाओं को अब और इंतजार नहीं करना चाहिए, उन्हें 2029 में ही वह हक मिलना चाहिए जिसकी वे हकदार हैं। राष्ट्रपति की सहमति मिलने के बाद 16 अप्रैल से लागू नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 (एक सौ छठा संविधान अधिनियम) से परिसीमन और आरक्षण को अलग किया जाना चाहिए।” उनके इस रुख की खूब चर्चा हो रही है।

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