Jharkhand News: संसद में मानसून सत्र के दौरान खान और खनिज संशोधन विधेयक, 2026 को दोनों सदनों में पास कर दिया गया है। जानकारी के मुताबिक यह विधेयक खनिज क्षेत्र में कर ढांचे एक समान बनाने, राज्यों द्वारा मनमाने कर/सेस पर रोक लगाने के तहत संशोधित किया गया है।
वहीं अब इसे लेकर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आपत्ति जाहिर की है। बता दें कि सीएम ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को इस मामले में पत्र लिखा। साथ ही एक्स हैंडल पर अपना गुस्सा जाहिर किया है।
नए बिल पर हेमंत सोरेन सरकार का फूटा गुस्सा
झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर जानकारी देते हुए लिखा कि “झारखंड ऐसा बड़ा आंदोलन करेगा, जिसे पूरा देश देखेगा। खनिज झारखंड का, जमीन झारखंड की—तो हमारे हक-अधिकार का फैसला दिल्ली क्यों करेगी? लोकसभा और राज्यसभा – दोनों सदनों में जल्दबाजी में खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पास करा केंद्र सरकार ने झारखंड के हाथ-पैरों को काटने का काम किया है।
झारखंड ऐसा बड़ा आंदोलन करेगा, जिसे पूरा देश देखेगा….
खनिज झारखंड का, जमीन झारखंड की—तो हमारे हक-अधिकार का फैसला दिल्ली क्यों करेगी?
लोकसभा और राज्यसभा – दोनों सदनों में जल्दबाजी में खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पास करा केंद्र सरकार ने झारखंड के हाथ-पैरों… pic.twitter.com/s3VzpacCbN
— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) August 13, 2026
यह काला बिल झारखंड और झारखंडियों के साथ अन्याय है, उनके विकास और भविष्य पर बहुत बड़ा कुठाराघात है। झारखंड यह सौतेला व्यवहार नहीं सहेगा। झारखंड में करोड़ों लोगों के सामाजिक सुरक्षा जैसे मईयां सम्मान योजना, अबुआ आवास योजना, पेंशन, शिक्षा, स्वास्थ्य, आदि योजनाएं बंद होने के कगार पर आ जाएगी”।
मुख्यमंत्री की केंद्र को खुली धमकी
मुख्यमंत्री जी ने आगे लिखा कि “झारखंड मुक्ति मोर्चा इसका पुरजोर विरोध करता है। अगर केंद्र सरकार ने यह काला बिल वापस नहीं लिया तो झारखंड ऐसा बड़ा आंदोलन करेगा, जिसे पूरा देश देखेगा। प्रत्येक जिला, प्रत्येक प्रखंड, प्रत्येक पंचायत, प्रत्येक शहर में इसका कड़ा विरोध किया जाएगा।
अगर केंद्र सरकार नहीं चेती, और झारखंड तथा झारखंडियों को उसका हक-अधिकार वापस नहीं किया गया तो झारखंड निर्णायक और ऐतिहासिक निर्णयों को लेने से पीछे भी नहीं हटेगा”। माना जा रहा है कि अगर केंद्र सरकार की तरफ से किसी प्रकार की प्रतिक्रिया सामने नहीं आती है तो झारखंड सरकार बड़ी कार्रवाई कर सकता है।







