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Maharashtra Civic Body Polls 2026: ‘सरकार की मंशा क्या है..,’ चुनावी प्रचार थमने के साथ बौखलाए ठाकरे ब्रदर्स, क्या मतदान से पहले मान रहे हार?

Maharashtra Civic Body Polls 2026: मतदान से ठीक एक दिन पहले राज ठाकरे की प्रतिक्रिया ने सवालों के अंबार लगा दिए हैं। राज ठाकरे द्वारा चुनावी प्रक्रिया और तैयारी पर सवाल खड़ा करने कई पहलुओं पर ध्यान आकर्षित करता है। यही वजह है कि ठाकरे ब्रदर्स की साख को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

Maharashtra Civic Body Polls 2026
Picture Credit: गूगल (सांकेतिक तस्वीर)

Maharashtra Civic Body Polls 2026: बहुचर्चित बीएमसी चुनाव की तारीख धीरे-धीरे नजदीक आ गई है। आगामी कल यानी 15 जनवरी को निकाय चुनाव के लिए मतदान होना है। इस दौरान 29 नगर निकायों के प्रतिनिधि चुने जाएंगे जो मुंबई के मेयर का चुनाव करेंगे। बृहन्मुंबई महानगरपालिका की सत्ता पाने के लिए जद्दोजहद जारी है। इस बीच ठाकरे ब्रदर्स पर सबकी निगाहें हैं जो अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। राज ठाकरे ने इस दौरान कुछ ऐसा कहा है जिसको लेकर सवालों के अंबार लग रहे हैं। पूछा जा रहा है कि क्या मतदान से पहले ही टाकरे ब्रदर्स हार मान बैठे हैं? आरोप-प्रत्यारोप का आशय क्या है? इससे इतर भी तमाम अन्य सवाल हैं जो बृहन्मुंबई महानगरपालिका चुनाव के संदर्भ में उठ रहे हैं जिनका जवाब ढूंढ़ने की कोशिश की जाएगी।

क्या मतदान से पहले मान रहे हार ठाकरे ब्रदर्स?

दरअसल, बीजेपी मजबूती के साथ निकाय चुनाव में एकतरफा जीत का दावा कर रही है। सीएम फडणवीस ने खुद कहा है कि 29 में से 26 निकायों में महायुति की जीत होगी।

इस बीच राज ठाकरे ने तल्ख प्रतिक्रिया दी है जो सवालों का अंबार खड़ा कर रही है। राज ठाकरे ने कहा कि “जनता को यह भी नहीं पता कि किस तरह की यूनिट लाई गई है या किस तरह की नई EVM मशीनें लगाई जा रही हैं। चुनाव आयोग ने इसे ठीक से समझाया या दिखाया नहीं है, और वह सवालों के जवाब भी नहीं दे रहा है। सरकार ने बिना किसी जवाबदेही के इसे जारी रहने दिया है। कानून बार-बार बदले जा रहे हैं, खासकर महाराष्ट्र में, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो रही हैं। नागरिक होने के नाते, ये सवाल पूछे जाने चाहिए कि सरकार की मंशा क्या है, और चुनाव आयोग आज़ादी से काम कर रहा है या दबाव में?” राज ठाकरे की इस प्रतिक्रिया को बौखलाहट के रूप नें देखा जा रहा है जिसके संदर्भ में तेजी से सवाल उठ रहे हैं।

चुनावी मैदान में किस्मत आजमा रहे सियासी धुरंधर

बीएमसी चुनाव कई मायनों में खास है। जहां एक ओर इस चुनाव को जीतने वाले सियासी दल का प्रभुत्व मजबूत होता है। वहीं दूसरी ओर बीएमसी चुनाव आर्थिक तौर पर बेहद खास है। यही वजह है कि महाराष्ट्र की सत्तारुढ़ बीजेपी से लेकर सहयोगी शिवसेना (शिंदे गुट), अजित पवार की एनसीपी, उद्धव-राज ठाकरे, शरद पवार और कांग्रेस अपने-अपने समीकरण सेट कर रहे हैं। कई जगहों पर बगावत का खुला खेल भी नजर आ रहा है, तो वहीं कुछ स्थानों पर सरकार में सहयोगी दल एक-दूसरे के सामने खड़े हैं। यही वजह है कि सभी सियासी धुरंधरों द्वारा बीएमसी चुनाव में अपनी किस्मत आजमाने की बात कही जा रही है। अब देखना दिलचस्प होगा कि ऊंट किस करवट बैठता है और बीएमसी चुनाव 2026 में किसकी जीत होती है।

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