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दक्षिण का किला फतह करने को तैयार RSS! तमिलनाडु में मोहन भागवत के ‘हिंदुत्व’ प्लान से सियासी हलचल; क्या डीएमके की बढ़ेगी परेशानी?

संघ प्रमुख Mohan Bhagwat ने तिरुचिरापल्ली से 'हिंदुत्व प्लान' पेश करते हुए इशारों-इशारों में ही डीएमके सरकार को चुनौती दे दी है। मोहन भागवत के बयान को 2026 विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। यही वजह है कि डीएमके के संदर्भ में सवाल उठाए जा रहे हैं।

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By: Gaurav Dixit

Published: दिसम्बर 11, 2025 6:17 अपराह्न

Mohan Bhagwat
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Mohan Bhagwat: दक्षिण का सियासी पारा तेजी से चढ़ता नजर आया है। तिरुपरंकुंद्रम पहाड़ी के कार्तिगई दीपम विवाद को लेकर संघ प्रमुख ने कुछ ऐसा कहा है जिसको लेकर तमिलनाडु की सियासत में उबाल है। मोहन भागवत की प्रदेश में उपस्थिति सत्तारुढ़ डीएमके के लिए चिंता का सबब बनी है। मंदिर और दरगाह के बीच अधिकार को लेकर उपजे विवाद के बीच मोहन भागवत ने ‘हिंदुत्व प्लान’ पेश किया है। आरएसएस प्रमुख का कहना है कि तमिलनाडु में हिंदुओं की जागृति वांछित परिणाम लाने के लिए पर्याप्त है।

संघ प्रमुख का ऐसा कहना दक्षिण के किला को फतह करने की उनकी रणनीति का संकेत है। तमिलनाडु चुनाव 2026 से पहले मोहन भागवत ने स्वयंसेवको को कहा है कि वे संघ की विचारधारा को लोगों तक पहुंचाए। ये साफ तौर पर दर्शाता है कि संघ अबकी बार डीएमके के लिए मैदान खाली नहीं छोड़ेगा। ऐसे में सवाल है कि क्या एमके स्टालिन के नेतृत्व वाले डीएमके की परेशानी बढ़ सकती है? आइए इस सवाल का जवाब ढू़ंढते हुए विस्तार से चर्चा करते हैं।

तमिलनाडु में Mohan Bhagwat के ‘हिंदुत्व’ प्लान से सियासी हलचल!

दक्षिण के अभेद सियासी किला को भेदने के लिए आरएसएस लगभग तैयार है। इसी बीच मोहन भागवत ने संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने पर तमिलनाडु का दौरा किया है।

संघ प्रमुख ने कहा है कि “यदि तिरुपरंकुंद्रम मुद्दे को आगे बढ़ाने की आवश्यकता हुई, तो ऐसा किया जाएगा। लेकिन मुझे नहीं लगता कि इसकी आवश्यकता है। मामला अभी न्यायालय में है। इसे सुलझने दीजिए। मुझे लगता है कि तमिलनाडु में हिंदुओं की जागृति वांछित परिणाम लाने के लिए पर्याप्त है। यदि इसकी आवश्यकता हुई, तो तमिलनाडु में कार्यरत हिंदू संगठन हमें सूचित करेंगे, तब हम इस पर विचार करेंगे। मुझे लगता है कि राज्य में हिंदुओं की संख्या के आधार पर इस मुद्दे का समाधान यहीं हो सकता है। हमें इसे आगे बढ़ाने की आवश्यकता नहीं होगी। इस मुद्दे का समाधान हिंदुओं के हित में होना चाहिए। यह निश्चित है, और हम इसके लिए हर संभव प्रयास करेंगे।”

मोहन भागवत द्वारा अपने संबोधन में कई दफा हिंदु हित का इस्तेमाल करना, उनके हिंदुत्व प्लान को दर्शाता है। इसको लेकर सूबे में सियासी हलचल भी तेज हो गई है और चर्चाओं का दौर जारी है।

क्या डीएमके के लिए बढ़ेगी परेशानी?

प्रदेश की सत्ता में जड़ जमा चुकी डीएमके के लिए वर्ष 2026 का चुनावी मैदान आसान नहीं रहने वाला है। एक ओर मशहूर अभिनेता विजय की टीवीके सत्तारुढ़ गठबंधन के लिए चुनौती पेश कर रही है, तो वहीं दूसरी ओर बीजेपी भी धीरे-धीरे सूबे में अपनी जड़ जमाने को बेताब है। आरएसएस प्रमुख अपने कार्यकर्ताओं से संघ की विचारधारा का प्रसार करने की बात कह चुके हैं। बीजेपी अपने संगठनात्मक शैली से ही धीरे-धीरे जड़ जमा रही है।

लोकसभा चुनाव 2024 में इसका असर भी नजर आया जब बीजेपी को 3.6 फीसदी वोट मिले। बीजेपी ने वाम दलों से अच्छा प्रदर्शन करते हुए आगामी चुनाव के लिए ताल ठोंक दी है। ये साफ तौर पर संकेत है कि डीएमके और कांग्रेस के लिए अगला चुनाव आसान नहीं होने वाला है। डीएमके की परेशानी बढ़ेगी या नहीं ये बाद का विषय है, लेकिन ये तय है कि केन्द्र की सत्तारुढ़ दल मजबूती से सूबे में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएगी।

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Gaurav Dixit

गौरव दीक्षित पत्रकारिता जगत के उभरते हुए चेहरा हैं। उन्होनें चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से अपनी पत्रकारिता की डिग्री प्राप्त की है। गौरव राजनीति, ऑटो और टेक संबंघी विषयों पर लिखने में रुची रखते हैं। गौरव पिछले दो वर्षों के दौरान कई प्रतिष्ठीत संस्थानों में कार्य कर चुके हैं और वर्तमान में DNP के साथ कार्यरत हैं।
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