Mohan Bhagwat: देहरादून में त्रिपुरा के रहने वाले एंजल चकमा की हत्या कर दी गई थी। जानकारी के मुताबिक छात्रा और उसके भाई पर कुछ युवाओं ने नस्लभेदी टिप्पणी की थी। जिसका एंजल चकमा ने विरोध किया था। वहीं अब इसे लेकर सियासत पूरी तरह से गरमा गई है। इसी बीच अब आरएसएस प्रमुख ने इस मामले पर टिप्पणी की है, और देशवासियों को खास नसीहत दी है। वहीं अब विपक्ष इस मामले पर हमलावर नजर आ रहा है। मोहन भागवत ने खुले तौर पर कहा की ऐसी घटनाएं सही नहीं है। चलिए आपको बताते है इससे जुड़ी सभी अहम जानकारी।
नस्लीय हमले पर Mohan Bhagwat ने दी प्रतिक्रिया
बुधवार को छत्तीसगढ़ के सोनपाईरी गांव में एक सभा को संबोधित करते हुए भगवत ने कहा, “लोगों को जाति, धन, भाषा या क्षेत्र के आधार पर मत आंकिए। सभी को अपना समझिए। पूरा भारत मेरा है।” देहरादून में कथित नस्लीय हमले के बाद त्रिपुरा के एक छात्र की हाल ही में हुई मौत के बीच, आरएसएस प्रमुख मोहन भगवत ने एकता और सामाजिक सद्भाव का आह्वान करते हुए जोर दिया कि भारत सबका है और लोगों को जाति, धन, भाषा या क्षेत्र के आधार पर नहीं आंका जाना चाहिए। गौरतलब है कि यह मामला पूरी तरह से गरमा हुआ है। वहीं विपक्ष अब इस मामले पर केंद्र सरकार पर लगातार हमलावर नजर आ रहे है।
घर के अंदर मातृभाषा बोलनी चाहिए – मोहन भागवत
कम से कम अपने घरों के अंदर तो हमें अपनी मातृभाषा में बात करनी चाहिए… यदि आप किसी दूसरे राज्य या क्षेत्र में रहते हैं, तो आपको उस राज्य या क्षेत्र की भाषा सीखनी चाहिए क्योंकि सभी भाषाएँ भारत की राष्ट्रीय भाषाएँ हैं। सभी का समान महत्व है।
सभी स्थानीय संसाधन और सुविधाएं, तालाब और कुएं जैसे जल स्रोत, मंदिर और मठ जैसे पूजा स्थल, धार्मिक गतिविधियों की व्यवस्था और यहां तक कि मृत्यु के बाद के अंतिम संस्कार भी सभी हिंदुओं के लिए खुले होने चाहिए। यदि यह संवाद और आपसी समझ के माध्यम से संभव हो तो ऐसा ही किया जाना चाहिए। हिंसा का कोई स्थान नहीं होना चाहिए, क्योंकि यह लोगों को एकजुट करने का विषय है, न कि उनके विरुद्ध संघर्ष करने का।






