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AI Impact Summit 2026: एआई समिट के बीच Sam Altman ने दी खुशखबरी, पहली बार ChatGPT पर हुए इतने एक्टिव यूजर्स; भारत के लिए क्या हैं इसके मायने

AI Impact Summit 2026

Photo Credit: Google

AI Impact Summit 2026: सोमवार से दिल्ली में एआई इम्पैक्ट समिट 2026 की शुरुआत हो गई है। राजधानी के भारत मंडपम में आयोजित 5 दिवसीय मेगा इवेंट में दुनियाभर के टेक प्रमुख और दिग्गज शामिल होंगे। इसमें ओपनएआई के चीफ सैम ऑल्टमैन का नाम भी शामिल है। समिट में भाग लेने से पहले सैम ऑल्टमैन ने भारत को खुशखबरी देते हुए बताया कि चैटजीपीटी पर एक्टिव यूजर्स की संख्या 100 मिलियन यानी 10 करोड़ हो गई है। ऐसे में यह भारत के लिए क्या मायने रखता है।

AI Impact Summit 2026: चैटजीपीटी पर बढ़ रही यूजर्स की संख्या

ओपनएआई के मुखिया सैम ऑल्टमैन ने कहा, ‘भारत अमेरिका के बाद चैटजीपीटी का दूसरा सबसे बड़ा एक्टिव यूजर्स वाला देश बन गया है। इंडिया ने इस स्थान को काफी समय से बनाए रखा है। इंडिया में चैटजीपीटी पर सबसे अधिक छात्र हैं। यह इस बात का संकेत है कि भारत के युवा कितनी तेजी के साथ एआई के साथ कनेक्ट हो रहे हैं, उससे सीख रहे हैं और आगे बढ़ने का तरीके के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं।’

एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के बीच सैम ऑल्टमैन ने जो जानकारी दी, उससे साफ है कि दुनियाभर की एआई कंपनियों की नजर भारत के बड़े यूजरबेस पर है। टेक कंपनियों ने प्रीमियम एआई टूल्स के लिए सस्ते सब्सक्रिप्शन प्लान उतारे हैं। इसके बाद एआई सेक्टर में चैटजीपीटी, गूगल जेमिनी, Perplexity AI और माइक्रोसॉफ्ट एआई कोपायलट की सर्विस को मुफ्त में भारत के लोगों तक पहुंचाया जा रहा है।

एआई इम्पैक्ट समिट 2026: चैटजीपीटी पर बढ़ते यूजर्स भारत के लिए क्या मायने रखते हैं?

उधर, चैटजीपीटी के बढ़ते यूजरबेस से भारत को कई तरह से फायदे हो सकते हैं। साथ ही कुछ चुनौतियों का भी सामना करना पड़ सकता है। एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के बीच चैटजीपीटी के बढ़ते एक्टिव यूजर्स की खबर देश के कई सेक्टर्स जैसे- एजुकेशन, स्किल विकास और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सिस्टम को बढ़ाने में मदद कर सकती है। चैटजीपीटी पर बढ़ते हुए यूजर्स का आंकड़ा बताता है कि इंडिया में तेजी से सभी वर्ग के लोग एआई के साथ कनेक्ट कर रहे हैं। इससे भारत की ग्लोबल लेवल पर एआई की नई शक्ति उभरकर सामने आ सकती है।

वहीं, चैटजीपीटी पर बढ़ता यूजरबेस इंटरनेट और ऑनलाइन की दुनिया में गलत जानकारी और फेक खबरों को तेजी के साथ फैलाने का काम कर सकता है। साथ ही यूजर्स की संवेदनशील जानकारी और डेटा प्राइवेसी खतरे में पड़ सकती है।

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