Artificial Intelligence: जैसे-जैसे एआई यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल बढ़ रहा है, वैसे-वैसे इसके खतरे भी सामने आ रहे हैं। पिछले एक साल के दौरान एआई ने सिर्फ आम लोगों को नहीं, बल्कि कई सेलिब्रिटियों को भी काफी बुरा अनुभव दिया। ऐसे में एआई अब एक टूल नहीं, बल्कि बड़ी-बड़ी हस्तियों को डराने और परेशान करने का जरिया बन चुका है। बीते साल डीपफेक एआई तकनीक ने कई बड़े नामों को बदनाम करने का काम किया। एआई डीपफेक टेक्नोलॉजी के कारण सेलिब्रिटियों की डिजिटल पहचान खतरे में पड़ती जा रही है। नामचीन हस्तियों को आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की वजह से एक नहीं, बल्कि कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
Artificial Intelligence से सेलिब्रिटीज को होते हैं कई नुकसान
इंटरनेट पर बीते कुछ समय में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की सहायता से बड़ी हस्तियों की फर्जी वीडियो और नकली फोटो को कुछ इस तरह से दिखाया जाता है कि उनकी पहचान को धक्का लगे। ऐसे में लोगों का उन पर भरोसा कम हो जाता है। इस दौरान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उनके फर्जी और आपत्तिजनक बयान, फोटो और वीडियो जारी किए गए।
पिछले एक साल के दौरान कई अभिनेताओं और अभिनेत्रियों ने अपनी डिजिटल पहचान को सुरक्षित करने के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटाया है। साथ ही कोर्ट से अपील की है कि उनकी डिजिटल इमेज के साथ प्राइवेसी का भी ध्यान रखा जाए। दरअसल, सोशल मीडिया पर सेलिब्रिटी की अनुमति के बिना उनकी फोटो, चेहरा, आवाज या डिजिटल पहचान का इस्तेमाल किया गया।
इसके अलावा, बड़ी हस्तियों के नाम पर सोशल मीडिया पर लोगों के साथ साइबर ठगों ने स्कैम को अंजाम दिया। ऐसे में अपराधियों ने सेलिब्रिटी की नकली फोटो, आवाज या वीडियो का इस्तेमाल करके पैसों की मांग, निवेश और डोनेशन देने की अपील की गई। ऐसे में सेलिब्रिटी को अपनी डिजिटल पहचान के गलत इस्तेमाल पर सफाई देने के लिए सामने आना पड़ता है। इससे उन्हें मानसिक और शारीरिक पीड़ा होती है।
आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से होने वाले नुकसान से निपटने के लिए क्या है कानून
यह तो आप जानते होंगे कि आज के टाइम में सभी टेक कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस को एडवांस बनाने की रेस में लगी हुई है। ऐसे में एआई के अनुचित उपयोग को रोकने के लिए कुछ टूल्स को उतारा गया है। वहीं, कुछ डीपफेक पहचानने के टूल्स बना रहे हैं। इंडिया में इसे लेकर कई कानूनों को लाने पर विचार किया जा रहा है। वर्तमान समय में एआई डीपफेक के जरिए किसी के साथ भी हुए अपराध के लिए आईटी एक्ट के तहत सजा का प्रावधान है। इसमें अधिकतम 5 साल तक की सजा समेत जुर्माना भी शामिल है। मगर विदेशों की तरह एआई से होने वाले नुकसान पर कानूनी एक्शन की कमी नजर आती है।
