Artificial Intelligence: किसी डिवाइस में एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का लेबल लगा दो, तो उसका दाम बढ़ जाता है? क्या आप इस बात से सहमत है? अगर हां, तो एआई का इस्तेमाल और जरूरत सिर्फ युवा पीढ़ी यानी जेन जी तक की सीमित क्यों रहनी चाहिए। जबकि आज के टाइम में बुजुर्गों को भी एआई की काफी आवश्यकता है। अगर वरिष्ठ नागरिक सही तरीके से अपनी दैनिक जिंदगी में एआई टूल्स का इस्तेमाल करते हैं, तो इससे रोजाना की लाइफ काफी सरल और सुरक्षित हो सकती है।
बुजुर्गों के लिए क्यों जरूरी है आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस?
टेक मार्केट में फोन कंपनियों ने अब तक कई मोबाइलों में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की खूबियों को शामिल किया है। ऐसे में एआई का यूज करके बुजुर्ग लोग अपने रोजमर्रा के काम को आसान बना सकते हैं। स्वास्थ्य और सुरक्षा में मदद ले सकते हैं। परिवार से जुड़े रहने में सुविधा प्रदान करता है। घर पर अकेलेपन को कम करने में मदद कर सकता है। इसके साथ ही बुजुर्ग एआई की मदद से अपनी सुरक्षा और नेविगेशन को बेहतर कर सकते हैं। कुल मिलाकर एआई वरिष्ठ नागरिकों के लिए आत्मनिर्भरता, सुरक्षा, मानसिक सक्रियता और परिवार से जुड़ाव में सरलता पैदा कर सकता है।
इन आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस टूल्स से बुजुर्गों को होंगे लाभ
ऐसे में आप समझ गए होंगे कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस सिर्फ जेन जी तक सीमित नहीं है, बल्कि बुजुर्गों के लिए भी काफी जरूरी है, जिससे वरिष्ठ नागरिकों को कई तरह के फायदे मिल सकते हैं।
वॉइस असिस्टेंट टूल- गूगल असिस्टेंस या अमेजन एलेक्सा की सहायता से बिना टाइप किए सवाल पूछना, अलार्म लगाना, दवाई का रिमाइंडर और मौसम और खबरें सुनना आदि जैसी जानकारी हासिल कर सकते हैं।
हेल्थ और मेडिकेशन ऐप्स या टूल- आजकल कई ऐसे एआई टूल और ऐप हैं, जो कि डॉक्टर से ऑनलाइन कंसल्ट, दवाई और अपॉइंटमेंट रिमाइंडर और हेल्थ रिकॉर्ड ट्रैक करने में मदद कर सकता है।
नेविगेशन और सुरक्षा- बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए मोबाइल में कई टूल और ऐप्स आते हैं। इनके जरिए किसी अनजान रास्ते को ढूंढना आसान हो जाता है। ट्रैफिक अपडेट और लोकेशन शेयर करके सुरक्षित रहने में मदद हो जाती है।
वीडियो कॉल और कनेक्टिविटी- सीनियर पर्सन्स के लिए वीडियो कॉल और कनेक्टिविटी के लिए कई ऐप मौजूद हैं। इनके जरिए बुजुर्ग लोग परिवार से वीडियो कॉल, फोटो और मैसेज शेयर करना और अकेलेपन को कम कर सकते हैं।





