Artificial Intelligence: अब हर डिवाइस, संस्थान और फील्ड में एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का प्रभाव देखने को मिल रहा है। ऐसे में हर कोई लोगों को एआई के नाम पर डराने का प्रयास कर रहा है। कई दिग्गज कंपनियों के प्रमुख दावा कर रहे हैं कि एआई अगले कुछ सालों में कई नौकरियों को समाप्त कर देगा। इसी बीच लोग अपने भविष्य को सुरक्षित करने के लिए नए-नए रास्ते तलाश रहे हैं। पैलेंटिर कंपनी के सीईओ एलेक्स कार्प ने इस संबंध में अपनी राय रखी है।
आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के दौर में कौन लोग रहेंगे सुरक्षित?
‘टीबीपीएन यानी टेक्नोलॉजी बिजनेस प्रोग्रामिंग नेटवर्क’ के पॉडकास्ट पर अमेरिकी सॉफ्टवेयर कंपनी पैलेंटिर ने एलेक्स कार्प ने कहा, भविष्य में केवल दो तरह के लोग ही सफल होंगे। वे जिनके पास वोकेशनल ट्रेनिंग है और न्यूरोडाइवर्जेंट व्यक्ति।न्यूरोडाइवर्जेंट, जो कि कोई मेडिकल शब्द नहीं है, उन लोगों के लिए इस्तेमाल होता है, जिन्हें दूसरों के साथ बातचीत करने और सामान्य स्थितियों में काम करने में मुश्किल होती है। इसका इस्तेमाल अक्सर ऑटिज्म, एडीएचडी, डिस्लेक्सिया और डिस्प्रैक्सिया जैसी स्थितियों के लिए किया जाता है।’ उन्होंने कहा, ‘जैसे आप लोग यहां बैठे हैं। आप कोई कॉर्पोरेट टूल वाली नौकरी कर सकते थे। जैसे कि लो एंड कोडिंग करना, लो एंड वकालत करना, या लो-एंड स्तर का पढ़ना-लिखना करना।’
इन लोगों पर नहीं पड़ेगा आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का प्रभाव
सॉफ्टवेयर कंपनी पैलेंटिर के सीईओ एलेक्स कार्प ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस पर बात करते हुए आगे कहा, ‘जिन लोगों के कौशल सामान्य आकार के होते हैं, वे सभी डिस्लेक्सिक होते हैं यानी, जो काम वे कर सकते हैं और जो पहले कभी कीमती हुआ करता था, वह अब उतना कीमती नहीं रहा। अब उन्हें जो चीज सीखनी है, वह यह है कि वे अधिक से अधिक एक कलाकार बनें, चीजों को एक अलग नजरिए से देखें, और कुछ अनोखा रचने में सक्षम हों। उन्होंने आगे कहा, ‘बढ़ईगीरी, बिजली का काम और प्लंबिंग जैसे व्यावहारिक कौशलों का महत्व काफी अधिक है। इन कामों के ऑटोमेटेड होने की संभावना कम है और इनकी मांग भी बहुत ज्यादा है।’
हालांकि, कुछ टेक लीडर्स अभी भी क्रिटिकल थिंकिंग और इमोशनल इंटेलिजेंस को बढ़ावा देने के लिए लिबरल आर्ट्स की पढ़ाई को अहम मानते हैं। ऐसे में भविष्य की नौकरियां काफी हद तक प्रैक्टिकल स्किल्स और लीक से हटकर सोचने की क्षमता पर काफी जोर दिया जाएगा।
