ChatGPT: अमेरिकी टेक कंपनी ओपनएआई ने 2022 में चैटजीपीटी को लॉन्च किया था। तब से लेकर अब तक इस चैटबॉट में कई तरह के अपग्रेड हो चुके हैं। चैटजीपीटी पलभर में किसी भी कठिन रीजनिंग के सवाल का जवाब दे सकता है। साथ ही स्कूल का होमवर्क और ऑफिस के कई कठिन कार्यों को मिनटों में पूरा कर देता है। ऐसे में जैसे-जैसे इस चैटबॉट का इस्तेमाल बढ़ रहा है, वैसे-वैसे लोगों को कुछ सावधानियां भी रखनी चाहिए। दरअसल, एलएलएम एआई मॉडल चैटजीपीटी में अभी भी कई तरह की कमियां हैं। ऐसे में आपको इन 5 चीजों का ध्यान रखना है।
ChatGPT का हर तथ्य 100 फीसदी सही नहीं
अक्सर देखने को मिलता है कि कोई भी छोटी जानकारी चाहिए होती है, तो लोग फौरन चैटजीपीटी पर खोजबीन करने लग जाते हैं। मगर चैटजीपीटी कभी-कभी गलत जानकारी भी प्रदान कर सकता है, जी हां, हर तथ्य 100 फीसदी सही हो, यह जरूरी नहीं है, इसलिए महत्वपूर्ण जानकारी हमेशा क्रॉस-चेक करनी चाहिए।
सीमित जानकारी का होना
आपको बता दें कि चैटजीपीटी को कई तरह की जानकारी से लैस किया गया है। मगर सीमित/पुरानी जानकारी हर मॉडल को पुराना बना देती है। ऐसे में नई घटनाओं की जानकारी तब तक नहीं होती, जब तक वेब टूल का उपयोग न किया जाए। इस वजह से लोगों को नई जानकारी के बजाय पुरानी जानकारी मिल जाती है।
इंसानों की तरह समझ नहीं
चैटजीपीटी एक एआई मॉडल है, ऐसे में इसके पास इंसानों की तरह समझ नहीं है। बल्कि यह पैटर्न पर काम करता है। यह इंसान की तरह सोचता नहीं है। यूजर्स डेटा के पैटर्न के आधार पर जवाब बनाता है। ऐसे में जवाब गलत भी हो सकते हैं। चैटजीपीटी सहानुभूति दिखा सकता है, लेकिन असली भावनाएं नहीं होतीं।
गोपनीयता सीमाएं
ओपनएआई द्वारा विकसित किया गया चैटजीपीटी एक मशीन है। ऐसे में यूजर्स के डेटा के साथ भविष्य में गलत इस्तेमाल हो सकता है। ऐसे में अपनी निजी या संवेदनशील जानकारी शेयर करने से पहले विचार करें। हमेशा सावधानी रखनी जरूरी है।
कभी-कभी पक्षपाती होना
बता दें कि चैटजीपीटी को किसी इंसान ने ही ट्रेनिंग दी है। ऐसे में कभी-कभी यह एआई मॉडल पक्षपाती हो जाता है। ऐसे में यूजर्स को सिर्फ एक ही पक्ष की डिटेल और उसके सकारात्मक पक्ष की जानकारी मिलती है। इस वजह से अक्सर यूजर्स भ्रमित हो जाते हैं, जिसका समाज में बुरा असर देखने को मिल सकता है।
चैटजीपीटी एक एआई टूल, इंसानी विशेषज्ञ का विकल्प नहीं
इस बात का ध्यान रखें कि चैटजीपीटी एक एआई मॉडल है, जिसे इंसानों ने ही ट्रेनिंग देकर विकसित किया है। ऐसे में इसमें गलती की संभावना है। यह एक एआई टूल है, जो सिर्फ इंसानों के सहायक के तौर पर काम कर सकता है। लेकिन यह अंतिम सत्य या इंसानी विशेषज्ञ का विकल्प नहीं है।






