Data Centre Boom: भारत के लोग जमकर एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का इस्तेमाल कर रहे हैं। बढ़ते इस्तेमाल के चलते डेटा सेंटर बूम हो रहा है। आपको यह बात जानकर खुशी हो सकती है। मगर नहीं, यह सिर्फ अच्छी खबर नहीं, बल्कि डराने वाली खबर भी है। इंडिया में डेटा सेंटर के बढ़ने से बिजली और पानी की मांग में भी बेतहाशा इजाफा देखने को मिल रहा है। ऐसे में कई बड़े शहरों में अभी से संकट के बादल मंडराने लगे हैं। ऐसे में कही एआई इन शहरों के विनाश की वजह न बन जाए।
Data Centre Boom से बिजली खत्म, क्या एआई लाएगी संकट?
कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि डेटा सेंटर की बढ़ती मांग से बेंगलुरू के बिजली ग्रिड पर काफी अधिक दबाव देखने को मिला है। इंडिया का सिर्फ बेंगलुरू ही नहीं, बल्कि मुंबई में भी डेटा सेंटर खोले जा रहे हैं। इस वजह से शहरों में बिजली की मांग बहुत तेज रफ्तार से बढ़ रही है। इन शहरों में कई आगामी प्रोजेक्ट में डेटा सेंटर खोले जाएंगे। ऐसे में आने वाले कुछ शहरों में इलेक्ट्रिसिटी ग्रिड मांग पूरी नहीं कर पाए, तो ब्लैकआउट का सामना करना पड़ सकता है।
वहीं, डेटा सेंटर्स में बड़े स्तर पर कूलिंग के लिए पानी की जरूरत होती है। ऐसे में मुंबई जैसे शहर में पानी का संकट अभी से देखने को मिल रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक,डेटा सेंटर बनने से पानी की मांग और दबाव बढ़ सकता है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां पहले से ही पानी की कमी है। डेटा सेंटर्स से शहरों में बिजली ग्रिड पर बहुत अधिक दबाव पड़ सकता है। देश के कई हिस्सों में अभी भी कमजोर ग्रिड प्रणाली काम कर रही है। ऐसे में गर्मी के दौरान बिजली की भारी मांग के दौरान ग्रिड सिस्टम फेल हो सकते हैं।
डेटा सेंटर बूम से आर्थिक फायदा या पर्यावरणीय आपदा?
गौरतलब है कि पिछले साल अमेरिका कई दिग्गज कंपनियों ने इंडिया में निवेश करने का ऐलान किया था। जानकारी के मुताबिक, माइक्रोसॉफ्ट 17.5 बिलियन डॉलर और अमेजन 35 बिलियन डॉलर का निवेश एआई सेक्टर में करेगी। इतने बड़े निवेश से जहां एक तरफ टेक इंडस्ट्री को तगड़ा फायदा मिलने का अनुमान है। बताया जा रहा है कि इतने बड़े निवेश से निर्माण, आईटी और क्लाउड में नई नौकरियों के अवसर पैदा हो सकते हैं। बिना डेटा सेंटर के एआई, क्लाउड और डिजिटल सेक्टर में सुपरपावर बनना मुश्किल है।
ऐसे में पर्यावरणीय आपदा का खतरा पैदा हो सकता है। इससे कई शहरों में पानी की समस्या बढ़ सकती है। खास बेंगलुरू जैसे शहर में जहां पर पानी का भूमिगत लेवल पहले ही काफी कम है। साथ ही यही स्थिति मुंबई की भी होने की संभावना जताई गई है।






