WhatsApp: एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के दौर में भी व्हाट्सएप का दबदबा कायम है। भारत समेत दुनियाभर इस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के अरबों यूजर्स हैं। मेटा के अधीन काम करने वाला यह प्लेटफॉर्म अक्सर किसी अपडेट की वजह से इंटरनेट पर छाया रहता है। मगर कई बार यह प्लेटफॉर्म कुछ गड़बड़ियों के कारण भी लोगों के निशाने पर रहा है। हालांकि, इस बार प्लेटफॉर्म ने कुछ खास काम किया है, जिससे भारत के सैंकड़ों यूजर्स को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
व्हाट्सएप पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम से मिलेगी बड़ी राहत
‘Hindustan Times’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप ने भारत के केंद्रीय गृह मंत्रालय को बताया है कि स्वतंत्र जांच के बाद उसने ‘डिजिटल अरेस्ट स्कैम’ से जुड़े लगभग 9400 अकाउंट्स को बैन कर दिया है। इसके साथ ही, केंद्र ने इस तेजी से फैल रहे धोखाधड़ी से निपटने के लिए बैंकों, टेलीकॉम रेगुलेटरों और जांच एजेंसियों को शामिल करते हुए एक तालमेल राष्ट्रीय ढांचे को तैयार करने की मांग की है। केंद्र सरकार ने देश की शीर्ष अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट को इस संबंध में अहम जानकारी साझा की है।
रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि देश मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ इस मामले में 12 मई को अगली सुनवाई करेगी। बता दें कि यह रिपोर्ट चार मोर्चों पर लागू किए जाने वाले उपायों को सामने रखती है, प्लेटफॉर्म की जवाबदेही, बैंकिंग सुरक्षा उपाय, सिम की ट्रेसिबिलिटी और पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए एक कानूनी ढांचा बनाने का कार्य किया है।
व्हाट्सएप ने उठाया यह कदम, अब यूजर्स को मिलेगी सुरक्षित सर्विस
अगर इन सुझावों को देश में लागू कर दिया जाएगा, तो इससे ऑनलाइन ठगी का शिकार होने वाले लोगों को बचाने में मदद मिलेगी। जालसाज अक्सर एक ही हैंडसेट का इस्तेमाल करते हुए बार-बार कई सिम कार्ड और अकाउंट बदलते रहते हैं। नंबर के बजाय डिवाइस को निशाना बनाने से दोबारा रजिस्ट्रेशन करना मुश्किल हो जाएगा।
ऐसे में डिवाइस-ब्लॉकिंग का प्रस्ताव ‘डिजिटल अरेस्ट स्कैम’ को रोकने में मदद कर सकता है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि जनवरी से शुरू हुई 12 हफ्तों की अवधि में व्हाट्सएप ने ‘I4C, MeitY और दूरसंचार विभाग से मिली जानकारी के आधार पर भारत में ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम से जुड़े 9400 से अधिक अकाउंट बैन कर दिए।
