OpenAI: आत्म सशक्तिकरण में कैसे योगदान दे सकता है ओपनएआई, चैटजीपीटी मेकर ने बताए एआई क्षमताओं को मैनेज करने के 3 सिद्धांत

OpenAI: चैटजीपीटी निर्माता ओपनएआई ने बताया कि लोग एआई की बढ़ती क्षमताओं को कैसे मैनेज कर सकते हैं। इससे लोगों को पर्सनल लेवल पर, बिजनेस में और कई देशों को भी फायदा हो सकता है।

OpenAI: भारत में एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का विस्तार बुलेट की रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में एआई सेक्टर में कई लोगों को नौकरी मिलने की संभावना जताई जा रही है। साथ ही कई रिपोर्ट्स में बताया गया है कि भारत एआई के मामले में काफी अच्छी पकड़ बना रहा है। इसके पीछे की वजह साफ है कि इंडिया में सबसे अधिक लोग रहते हैं, जो कि एआई का इस्तेमाल करके इसे बूस्ट देने का काम भी कर सकते हैं। एआई की बढ़ती क्षमताओं के बीच लोकप्रिय चैटबॉट बनाने वाली कंपनी ओपनएआई ने अहम जानकारी शेयर की है। चैटजीपीटी निर्माता ने कहा कि हम लोगों को सशक्त बनाने के लिए एआई बनाते हैं।

OpenAI ने बताया एआई की क्षमताओं को कैसे मैनेज करें

चैटजीपीटी मेकर ओपनएआई ने बताया, ‘हम लोगों को सशक्त बनाने के लिए एआई बनाते हैं। जैसे-जैसे एआई टेक्नोलॉजी में तरक्की जारी है, दुनिया का मुख्य फोकस कैपेबिलिटी ओवरहैंग को ट्रैक करने पर होना चाहिए। एआई सिस्टम अब क्या कर सकते हैं और अधितकर लोग, बिजनेस और देश असल में उनसे बड़े पैमाने पर कितना वैल्यू हासिल कर रहे हैं, इसके बीच का अंतर।’

दिग्गज टेक कंपनी ने कहा, ‘एआई की क्षमता ओवरहैंग के साइज को समझने में एक चुनौती यह है कि एआई एक बहुत ही अजीब टेक्नोलॉजी है, जो लगातार चौंकाने वाले तरीकों से काम करती है। हमने तीन साल पहले एक उस समय के एडवांस्ड एआई के साथ चैटजीपीटी लॉन्च किया था, जो आसान सवालों के जवाब दे सकता था, और हम यह देखकर हैरान थे कि इसे कितनी जल्दी अपनाया गया और लोगों ने इसे अपनी जिदगी में इस्तेमाल करने के लिए कितने क्रिएटिव तरीके ढूंढे।’

हमें अभी तक पूरी तरह से नहीं पता कि यह बिजनेस या पर्सनल लाइफ में कैसे इंटीग्रेट होगा- ओपनएआई

एआई टूल बनाने वाली कंपनी ओपनएआई ने कहा, ‘अब हमारे पास एडवांस्ड एआई है, जो सॉफ्टवेयर बनाने से लेकर मैथमेटिकल रिसर्च करने तक, अधिक से अधिक मुश्किल कामों में सोच-समझकर काम कर सकता है, और हमें अभी तक पूरी तरह से नहीं पता कि यह बिजनेस या पर्सनल लाइफ में कैसे इंटीग्रेट होगा। इन टूल्स को एक्सप्लोर करने वाले लोगों की एक कम्युनिटी की जरूरत होती है, ताकि वे नए शानदार इस्तेमाल ढूंढ सकें जो इनकी क्षमता ने मुमकिन किए हैं।’

आत्म सशक्तिकरण में मदद कर सकते हैं ये 3 सिद्धांत

एआई क्षमताओं को मैनेज करने के लिए ओपनएआई ने 3 सिद्धांतों को बताया है। इनके जरिए लोग आत्म सशक्तिकरण के लिए मदद ले सकते हैं।

  • चैटजीपीटी मेकर ने यूजर्स को भरोसा दिलाया कि प्लेटफॉर्म पर सही जानकारी से काफी तरह के फायदे हो सकते हैं। इसी जानकारी के जरिए लोग बिजनेस और नई नीतियों पर काम कर सकते हैं। साथ ही अपनी प्रोडक्टिविटी में भी इजाफा कर सकते हैं। यह भी जान सकते हैं कि एआई का असल में कैसे इस्तेमाल हो रहा है?
  • ओपनएआई ने बताया कि एआई टूल्स तक जैसे-जैसे लोगों की पहुंच बढ़ेगी, वैसे-वैसे यूजर्स अपने बिजनेस को नया आकार दे सकते हैं। साथ ही एआई को पूरी तरह से अपनाने के लिए एक निर्धारित तरीके की जरूरत है। इसलिए हर व्यक्ति, बिजनेस और देश को कंप्यूट का अपना हिस्सा एक्सेस करने के तरीकों की जरूरत है।
  • एआई टूल्स बनाते वक्त लोगों को भविष्य की संभावनाओं का भी ध्यान रखना होगा। लोगों को एआई टूल्स बनाते वक्त उसे इस तरह से डिजाइन करना होगा कि वे कस्टमाइजेबल और इस्तेमाल करने लायक हों। इससे डेली यूजर्स और छोटे कारोबारियों को काफी फायदा होने की उम्मीद है।

इस तरह से आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का सहारा लेकर एक ऐसे भविष्य का निर्माण कर सकते हैं, जो कि आज से काफी बेहतर होगा। इससे लोगों को, बिजनेस और कई देशों को भी एआई को जानने में और उसे आगे लेकर जाने में सुविधा हो सकती है।

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