Noida International Airport: देश के सबसे चर्चित एयरपोर्ट और एशिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट के संचालन को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। गौरतलब है कि कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए नए-नए एक्सप्रेसवे का निर्माण किया जा रहा है। नए-नए रूट तैयार किए जा रहे है, ताकि एयरपोर्ट तक की कनेक्टिविटी आसान हो जाए। इसी बीच अब एक ऐसी खबर सामने आ रही है, जिसने दिल्लीवासियों को चौंका दिया है। दरअसल गुरूग्राम से नोएडा आने में काफी समय लग जाता है। अगर जाम मिल जाए त यग सफर 2 से 3 घंटे का हो जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री द्वारा किए गए एक हालिया अध्ययन के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर के लिए प्रस्तावित एयर टैक्सी कॉरिडोर गुड़गांव, मध्य दिल्ली और जेवर स्थित नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के बीच यात्रा के समय को काफी कम कर सकता है। चलिए आपको बताते है इससे जुड़ी सभी अहम जानकारी।
गुरुग्राम से नोएडा एयरपोर्ट की दूरी मिनटों में होगी पूरी
आने वाले समय में गुरूग्राम से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की दूरी मात्र 30 मिनट की रह जाएगी। जी हां आपने सही सुना, सबसे दिलचस्प बात है कि यह सफर सड़क के माध्यम से नहीं होगा, यात्री हवाई यात्रा की मदद से सीधा गुरूग्राम से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंच सकेंगे। दरअसल भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में एयर टैक्सी सेवाएं शुरू करने की योजना बनाई है,
जिसका उद्देश्य प्रमुख शहरी और बुनियादी ढांचा केंद्रों के बीच भीड़भाड़ कम करना और यात्रा में लगने वाले लंबे समय को घटाना है। इस प्रस्ताव में इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग (ईवीटीओएल) विमानों का उपयोग करके गुरुग्राम, मध्य दिल्ली के कनॉट प्लेस और नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (जेवर) को जोड़ने पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
गुरूग्राम से दिल्ली की दूरी केवल 12 मिनट में होगी पूरी
एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रस्तावित हवाई गलियारे की दूरी लगभग 65-75 किलोमीटर होगी, जो मार्ग संबंधी बाधाओं पर निर्भर करेगी। इन स्थानों के बीच सड़क मार्ग से यात्रा में व्यस्त समय में दो से तीन घंटे लगते हैं, जबकि हवाई टैक्सी मार्ग से यह दूरी 30 मिनट से भी कम समय में तय की जा सकती है। अकेले गुरुग्राम और मध्य दिल्ली के बीच हवाई यात्रा का समय 12 मिनट से भी कम होने का अनुमान है। इस अध्ययन में अस्पतालों, कार्यालय भवनों और ऊंची इमारतों पर बड़े जमीनी स्तर के संयंत्रों के निर्माण के बजाय छत पर वर्टीपोर्ट (वर्टीपोर्ट) लगाने का भी प्रस्ताव है। इस दृष्टिकोण से बुनियादी ढांचे की लागत में लगभग 30-50 प्रतिशत की कमी आने और तैनाती की समयसीमा कम होने की उम्मीद है। हालांकि इसमे काफी अड़चने भी है, जिससे इस प्रोजेक्ट की दिक्कतें बढ़ सकती है।






