Ram Mandir Chanda Chori: राम मंदिर बीते कई दिनों से सुर्खियों में बना है। वहीं विपक्ष की तरफ से लगातार मोदी सरकार पर कटाक्ष किया जा रहा है। सपा से लेकर कांग्रेस सब के सब एक साथ सरकार के खिलाफ एक सुर में आवाज लगा रहे है। वहीं अब इसे लेकर कई तरह की खबरें सामने आ रही है।
हालांकि यूपी सरकार की तरफ से मामले की जांच के लिए तुरंत एसआईटी का गठन किया गया था, और रिपोर्ट सामने आने के बाद लगातार गिरफ्तारियां की जा रही है। इस मामले में दो नाम काफी चर्चा में है, पहले चंपत राय और दूसरे अनिल मिश्रा, वहीं अब चंपत राय को लेकर विश्व हिंदू परिषद ( वीएचपी) प्रमुख आलोक कुमार ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
चंपत राय को लेकर क्या बोले वीएचपी चीफ आलोक कुमार
हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत के दौरान विश्व हिंदू परिषद के प्रमुख आलोक कुमार ने कहा कि “चंपत राय VHP के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। इसलिए नैतिक आधार पर, वीएचपी की ओर से कोई कार्रवाई की जानी चाहिए। हमने उन्हें उस पद [ट्रस्ट के महासचिव का पद] के लिए नॉमिनेट नहीं किया था।
वे विश्व हिंदू परिषद का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं। हम इसके लिए ज़िम्मेदार नहीं हैं। जो कुछ भी हुआ है वह दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन वीएचपी, आरएसएस और प्रधानमंत्री कार्यालय को इसमें घसीटने की कोशिशें अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर की जा रही हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जांच अभी जारी है।
विपक्षी पार्टियों पर आलोक कुमार ने किया तंज
Ram Mandir Chanda Chori मामले में विपक्ष लगातार हमलावर नजर आ रहा है। वहीं विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए आलोक कुमार ने कहा कि “क्या किसी व्यक्ति का मीडिया ट्रायल होना चाहिए? क्या सिर्फ़ इसलिए पगड़ी उछाली जानी चाहिए क्योंकि चुनाव नज़दीक हैं? मर्यादा की सीमाएँ तोड़ी जा रही हैं।
Delhi: Vishwa Hindu Parishad (VHP) President Alok Kumar says, “Should there be a media trial of any individual? Should turbans be tossed around just because elections are approaching? The boundaries of propriety are being broken. Even prominent leaders are claiming that theft of… pic.twitter.com/nnT7C9D3uN
— IANS (@ians_india) July 1, 2026
यहाँ तक कि बड़े नेता भी दावा कर रहे हैं कि ₹2,000 करोड़ की चोरी हुई है। पुलिस को उन्हें एक बार बुलाकर पूछना चाहिए कि उनके पास क्या सबूत हैं। अगर कोई सबूत नहीं है, तो ऐसे बयान देना और अफ़वाहें फैलाना जिनसे सनसनी, असंतोष और हिंसा फैल सकती है, BNS की धारा 353 के तहत अपराध है।”
