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Simla Agreement निलंबित कर Pakistan ने अपने ही पैर पर मारी कुल्हाड़ी! जानें कैसे भारत का बाल भी बांका नहीं कर पाएगा आतंक का आका?

अंदरखाने मची हलचल के बीच पाकिस्तान का आनन-फानन में Simla Agreement रद्द करना, खुद के पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है। दावा किया जा रहा है कि इस फौरी कदम से आतंक का आका पाकिस्तान, भारत का बाल भी बांका नहीं कर पाएगा।

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By: Gaurav Dixit

Published: अप्रैल 25, 2025 1:22 अपराह्न

Simla Agreement
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Simla Agreement: आनन-फानन में फौरी तौर पर आतंक के आका ऐसे कदम उठा रहा है, जो उसके लिए ही काल साबित हो सकता है। शिमला समझौता को निलंबित करना उनमें से एक है। सिंधु जल संधि रद्द करने के बाद Pakistan ने शिमला एग्रीमेंट को निलंबित कर दिया है। हालांकि, उसकी ये जवाबी कार्रवाई उन्हीं के लिए मुसीबतों का दौर लेकर आएगी। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि इसके पीछे कई मजबूत तर्क हैं। दावा किया जा रहा है कि सिंधु जल संधि का निरस्त होना, तो पाकिस्तान के लिए काल बनेगा ही। साथ ही Simla Agreement निलंबित होने की आंच भी उन्हीं पर आएगी और आतंक का आका पड़ोसी मुल्क, भारत का बाल भी बांका नहीं कर पाएगा। ऐसे में आइए हम भी आपको सभी संभावित समीकरणों के बारे में विस्तार से बताते हैं।

Pakistan ने Simla Agreement को निलंबित कर अपने ही पैर पर मारी कुल्हाड़ी!

अतीत के पन्ने पलटेंगे तो आपको ऐसे कई मौके नजर जाएंगे, जब पाकिस्तान शिमला एग्रीमेंट को अनाधिकारिक रूप से तोड़ चुका है। 1999 का कारगि वार उनमें से प्रमुख है। इसके अलावा उरी, पठानकोट के बाद अब पहलगाम में आतंकी हमले को अंजाम देना Pakistan के नापाक मंसूबों को दर्शाता है। ये कुछ उदाहरण बताने के लिए काफी हैं कि पाकिस्तान के लिए शिमला एग्रीमेंट की क्या अहमियत थी। 1972 में हुआ शिमला समझौता कागज एक टूकड़ा मात्र बनकर रह गया था जिसे अब आधिकारिक रूप से तोड़ दिया गया है। Simla Agreement का टूटना भारत के लिए इसलिए भी ठीक है क्योंकि अब बंदिशे नहीं होंगी। दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान ने ‘मरे हुए समझौते की अंत्येष्टि’ कर दी है जो उसी के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।

इस फैसले से भारत अब बढ़-चढ़कर कश्मीर मामले को दुनिया के समक्ष उठाएगा और पाकिस्तान को बेनकाब करेगा। इसके साथ ही सीमा पर गोलीबारी की बंदिशे भी समाप्त हो गई हैं और जैसे को तैसा करने में मदद मिलेगी। वैसे भी पाकिस्तान का सामना ताकत से ही किया जा सकता है न कि शिमला समझौते से। यही वजह है कि Simla Agreement के टूटने से भारत के सेहत पर कोई असर नहीं पड़ता नजर आ रहा है, बल्कि ये बैकफायर होकर पाकिस्तान को ही नुकसान पहुंचा सकता है।

भारत-पाकिस्तान के बीच 1972 में हुए शिमला एग्रीमेंट के खास मायने?

इसे समझना बेहद जरूरी है। दशकों पहले 1971 में हुए भारत-पाकिस्तान वॉर के बाद दोनों देशों के बीच एक समझौता हुआ। शिमला समझौता को औपचारिक रूप से दोनों देशों के बीच शत्रुता खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम माना गया। हालांकि, स्थिति नहीं सुधरी और समय-समय पर Pakistan की नापाक करतूतें सामने आती रहीं। Simla Agreement के तहत द्विपक्षीय वार्ता और शांतिपूर्ण तरीकों से समस्या का समाधान करने की बात कही गई। लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) बना। लेकिन पाकिस्तान की नापाक करतूतें फिर भी सामने आती रहीं और वो ज्यादातर बार इसका उल्लंघन करता रहा। यही वजह है कि जब पाकिस्तान की ओर से शिमला एग्रीमेंट रद्द किया गया है तो, इसे भारत के लिए अवसर के रूप में देखा जा रहा है।

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Gaurav Dixit

गौरव दीक्षित पत्रकारिता जगत के उभरते हुए चेहरा हैं। उन्होनें चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से अपनी पत्रकारिता की डिग्री प्राप्त की है। गौरव राजनीति, ऑटो और टेक संबंघी विषयों पर लिखने में रुची रखते हैं। गौरव पिछले दो वर्षों के दौरान कई प्रतिष्ठीत संस्थानों में कार्य कर चुके हैं और वर्तमान में DNP के साथ कार्यरत हैं।
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