Ayatollah Ali Khamenei: मिडिल ईस्ट में छिड़ा ताजा सियासी संग्राम दशकों पुराने एक घटनाक्रम की याद दिला रहा है। इजरायल द्वारा ईरान पर हमला किए जाने के बाद अमेरिका मुखरता से अली खामेनेई को चेता रहा है। डोनाल्ड ट्रंप साफ कह रहे हैं कि ईरानी सेना हथियार डाले अथवा परिणाम बुरे होंगे। यहां बुरा परिणाम से आशय ईरानी सुप्रीम लीडर आयातुल्ला अली खामेनेई के अंत से लगाया जा रहा है। इसको लेकर दशकों पुराना एक घटनाक्रम पर नजर जाती है। ऐसे ही कभी अमेरिका इराक के तानाशाह सद्दाम हुसैन के पीछे पड़ा था।
अंतत: अमेरिका ने 2003 में सद्दाम हुसैन से सत्ता की गद्दी छीन ली। तब डॉर्ज डब्ल्यू बुश अमेरिका के राष्ट्रपति हुआ करते थे। ऐसे में बड़ा सवाल है कि क्या डोनाल्ड ट्रंप जॉर्ज बुश के नक्शे कदम पर आगे बढ़ रहे हैं? क्या आयातुल्ली अली खामेनेई के साथ वही होगा जो कभी सद्दाम हुसैन के साथ हुआ था? मिडिल ईस्ट में क्या जॉर्ज बुश द्वारा रचित इतिहास दोहराया जाएगा? ऐसे तमाम सवाल हैं जिनका जवाब ढूंढ़ने की कोशिश की जाएगी। इसके साथ ही इजरायल ईरान वॉर से जुड़े ताजा अपडेट्स भी बताए जाएंगे।
क्या इराक वाले सद्दाम हुसैन जैसा होगा Ayatollah Ali Khamenei का हस्र?
अतीत के पन्ने पलटने पर मिडिल ईस्ट में हुई एक और घटना पर नजर जाती है। बात 2003 की है जब सद्दाम हुसैन पर अमेरिका का चाबुक चला था। जॉर्ज बुश के राष्ट्रपति रहते हुए सद्दाम हुसैन को इराक की गद्दी से हटाया गया जिसके बाद कारावास में रहते हुए 2006 में उन्हें सजा-ए-मौत दी गई। इराक से सटे ईरान पर कुछ ऐसा ही संकट मंडराता नजर आ रहा है। ईरान में 1979 से मौलवी शासन है और अब आयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ आवाज मुखरता से उठी है। इजरायली सेना ने तो आनन-फानन में आज ईरान पर हमला ही बोल दिया है।
दुनिया जानती है कि ईरान पर हमला करने वाले इजरायल के पीछे अमेरिका खड़ा है। यही वजह है कि इतिहास दोहराए जाने के संदर्भ में चर्चा हो रही है। अमेरिका शुरू से ईरान में मौलवी शासन का विरोधी रहा है। डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया है कि यदि ईरानी सेना हथियार नहीं डालती है, तो बर्बादी का मंजर नजर आएगा। इसका आशय अली खामेनेई के खात्मा से है। डोनाल्ड ट्रंप खामेनेई पर मानवता विरोधी होने का आरोप लगा चुके हैं। ऐसे ही कभी इराक के शासक सद्दाम हुसैन पर मानवता के खिलाफ अपराध का मुकदमा चला था।
जैसे ईरान से परमाणु समझौता को लेकर अमेरिका की ठनी है। वैसे ही 1990 के दौर में अमेरिका ने इराक के पास विनाशकारी हथियार होने और सद्दाम हुसैन के संबंध आतंकवादी समूहों से होने का दावा किया था। इसको आधार बनाकर अमेरिका ने इराक पर हमला बोला। अंतत: दिसंबर 2003 में सद्दाम हुसैन की गिरफ्तारी हुई। इराकी न्यायाधिकरण में मामला चला और 2006 में सद्दाम हुसैन को सजा दी गई। तब जॉर्ज बुश इराक के पीछे पड़े थे। अब डोनाल्ड ट्रंप मौलवी शासन के खिलाफ हैं। यही वजह है कि इतिहास दोहराए जाने के संदर्भ में आशंका है।
ईरान में मौलवी शासन के खिलाफ गहराया संकट!
तेहरान से लेकर इस्फहान, तबरेज, मशहद समेत ईरान के सभी प्रमुख शहर अलर्ट पर हैं। दरअसल, इजरायल ने मौलवी शासन को चकमा देते हुए ईरान पर हमला बोल दिया है। इजरायली हमले को अमेरिका का बैकअप प्राप्त है। यही वजह है कि ईरान में युद्ध का संकट और गहरा गया है। इजरायली सेना द्वारा की गई बमबारी के बाद मुल्क हाई अलर्ट पर है। खबर है कि सेना ने खामेनेई के दफ्तर व अन्य प्रमुख कार्यालयों को निशाना बनाया है। इसका आशय स्पष्ट है कि इजरायल और अमेरिका का साझा लक्ष्य आयातुल्ली अली खामेनेई को मौत के घाट उतारना है।
हालांकि, खबर है कि खामेनेई को किसी सुरक्षित ठिकाने पर शिफ्ट किया गया है। वो फिलहाल ईरान के बाहर किसी खुफिया स्थान पर हैं। बावजूद इसके इजरायली सेना और खूंखार रूप धारण करती नजर आ रही है। ईरानी हमलों के बाद इजरायल फिर हमले के लिए तैयार है। डोनाल्ड ट्रंप लगातार हथियार डालने की धमकी दे रहे हैं। अमेरिकी फाइटर जेट्स और नौसेना ईरान की घेराबंदी किए हुए हैं। यदि अमेरिका प्रत्यक्ष रूप से जंग-ए-मैदान में आया, तो आयातुल्ला अली खामेनेई का मुश्किलें और बढ़ेंगी। फिर देखना दिलचस्प होगा कि ईरानी शासक कैसे अपने प्राण की रक्षा करते हैं।






