Tarique Rahman: पड़ोसी मुल्क में आम चुनावों के परिणाम ने समीकरण को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है। तारिक रहमान जिया की बांग्लादेशी नेशनलिस्ट पार्टी यानी बीएनपी को मिली बंपर जीत कई देशों के लिए संदेश दे रही है। भारत का नाम भी उसमें शुमार है जो तारिक रहमान की जीत के बाद संबंधों को पटरी पर लौटने की उम्मीद लगाए है।
दूसरी ओर चीन-पाकिस्तान जैसे मुल्क हैं जो मोहम्मद युनूस के दौर में बांग्लादेश से लगाव रखते थे। हालांकि, अब तारिक रहमान की बीएनपी को मिली बंपर जीत चीन-पाकिस्तान के लिए झटका माना जा रहा है। उदार व्यक्तित्व वाले तारिक रहमान मुल्क के अगले पीएम होंगे ये लगभग स्पष्ट है। ऐसे में इस बदले समीकरण के भारत के लिए मायने क्या हैं इसके बारे में बताने की कोशिश हम करेंगे।
बीएनपी को मिली बंपर जीत चीन-पाकिस्तान के लिए क्यों है झटका?
पड़ोसी मुल्क में बदला समीकरण चीन के साथ पाकिस्तान के लिए भी करारा झटका माना जा रहा है। 25 वर्षों बाद ढ़ाका लौटे तारिक रहमान जब बांग्लादेश के पीएम बनेंगे, तब सत्ता की शीर्ष पर एक उदारवादी व्यक्ति बैठा होगा। अपने चुनाव प्रचार के दौरान तारिक रहमान ने रावलपिंडी से दूरी बनाने का जिक्र किया। शेख हसीना के तख्तापलट के बाद चीन और पाकिस्तान की दखल बांग्लादेश में खूब देखने को मिली थी। दोनों ने मिलकर मोहम्मद यूनुस को अपने इशारों पर नचाया। हालांकि, अब समीकरण बदल सकता है।
सत्ता की शीर्ष पर तारिक रहमान बैठेंगे जिनसे भारत के ताल्लुकात अच्छे बताए जा रहे हैं। बीएनपी की जीत के बाद पीएम मोदी विश्व के पहले नेता बने जिन्होनें तारिक रहमान को बधाई दी। इतना ही नहीं, तमाम तल्खियों के बावजूद पूर्व पीएम खालिदा जिया के निधन पर एस जयशंकर ढ़ाका पहुंचे थे। इतना ही नहीं, तारिक रहमान जानते हैं कि पाकिस्तान को साथ लेकर चलने के बाद वैश्विक मंच पर उनकी साख प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि बीएनपी को मिली बंपर जीत चीन-पाकिस्तान के लिए झटका मानी जा रही है।
भारत के लिए Tarique Rahman की जीत के मायने क्या?
बीएनपी की जीत भारत के लिए कई खास मायनों की ओर संकेत देती है। बांग्लादेश की 94 फीसदी सीमा भारत से लगती है। मुल्क चारो तरफ से भारत से घिरा है। ऐसे में सुरक्षा से लेकर व्यापार तक बांग्लादेश ज्यादातर भारत पर निर्भर है। दूसरी बात ये है कि शेख हसीना जब पीएम थीं तब वे भारत के साथ कदम से कदम मिलाकर चलती थीं। वैश्विक मंच पर उन्हें इसका लाभ भी मिलता था।
यही वजह है कि तारिक रहमान भी उसी तर्ज पर भारत के साथ ढ़ाका संबंध मजबूत रखना चाहेंगे। भारत पहले ही साफ कर चुका है कि हम नई सरकार के साथ मजबूती से काम करने को तैयार हैं। मोहम्मद यूनुस के दौर में चीन और पाकिस्तान से नजदीकी साध चुकी बांग्लादेशी हुकूमत अब फूंक-फूंककर कदम रखती नजर आएगी। इसका असर नई दिल्ली और ढ़ाका के संबंध पर पड़ सकता है। अब देखना दिलचस्प होगा कि नए नेता किस हद तक भारत के साथ कदम से कदम मिलाते हैं।






